पूर्वांचल विश्वविद्यालय ट्रेंडिंग पाठ्यक्रम से आधुनिक प्रयोगशाला तक पढ़ाई का स्तर करेगा उन्नत
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय बदलते समय और रोजगार की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा के स्तर को उन्नत करेगा। इसमें ...और पढ़ें

पूर्वांचल विश्वविद्यालय में शिक्षा का आधुनिकीकरण: नए पाठ्यक्रम, कौशल विकास और उन्नत प्रयोगशालाएं।
HighLights
पूर्वांचल विश्वविद्यालय शिक्षा के स्तर को उन्नत करेगा।
नए विषयों और तकनीकी बदलावों को पाठ्यक्रमों में शामिल करेंगे।
आधुनिक शिक्षण पद्धति और नवीन प्रयोगशाला उपकरण विकसित होंगे।
जागरण संवाददाता, मल्हनी (जौनपुर)। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में बदलते समय, तकनीक और रोजगार की जरूरतों के अनुरूप पढ़ाई के स्तर को उन्नत करने की तैयारी है। पाठ्यक्रमों में नए विषयों और तकनीकी बदलावों को शामिल करने के साथ कक्षा-कक्षों में आधुनिक शिक्षण पद्धति तथा प्रयोगशालाओं में नवीन उपकरण और सुविधाएं विकसित की जाएंगी। विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय व्यावहारिक ज्ञान, कौशल और शोध से जोड़ने पर जोर रहेगा।
कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने शिक्षकों को अपने विषय में लगातार सीखते रहने और स्वयं को अद्यतन रखने के लिए प्रेरित किया है। विषयों में हो रहे बदलाव, नई तकनीक, शोध की दिशा, शिक्षण पद्धति और रोजगार की बदलती जरूरतों से परिचित रहने के लिए शिक्षकों के प्रशिक्षण और अध्ययन पर जोर दिया जाएगा।आवश्यकता के अनुसार उन्हें संबंधित संस्थानों और विशेषज्ञों से सीखने के अवसर भी मिलेंगे। शिक्षक स्वयं जितना नया सीखेंगे, उसका लाभ विद्यार्थियों की कक्षा तक पहुंचेगा।
पाठ्यक्रमों को भी समय की जरूरत के अनुरूप विकसित किया जाएगा। नए विषयों और तकनीकी बदलावों के साथ व्यावहारिक ज्ञान, कौशल विकास, शोध और रोजगारपरक शिक्षा को अधिक स्थान दिया जाएगा। विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही उन क्षेत्रों की जानकारी और प्रशिक्षण मिलेगा, जिनकी वर्तमान समय में शैक्षणिक, औद्योगिक और रोजगार के क्षेत्र में मांग है। इससे उच्च शिक्षा के साथ रोजगार और स्वरोजगार के लिए उनकी तैयारी को भी दिशा मिलेगी।कक्षा-कक्षों में पढ़ाने के तरीके में भी बदलाव किया जाएगा।
डिजिटल अध्ययन सामग्री, विषय आधारित तकनीकी संसाधनों और विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता वाली शिक्षण पद्धति को बढ़ावा मिलेगा। पढ़ाई केवल व्याख्यान तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने, चर्चा करने, विषय को समझने और समाधान खोजने की प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा। इससे सैद्धांतिक ज्ञान के साथ विषय की व्यावहारिक समझ भी विकसित होगी।
प्रयोगशालाओं को भी शैक्षणिक उन्नयन का प्रमुख आधार बनाया जाएगा। आधुनिक उपकरणों और तकनीकी सुविधाओं के साथ नियमित प्रयोग, परियोजना आधारित अध्ययन और शोध कार्य को बढ़ावा दिया जाएगा। विद्यार्थी कक्षा में पढ़े सिद्धांतों को प्रयोगशाला में स्वयं करके समझ सकें, इसके लिए आवश्यक संसाधनों का विस्तार किया जाएगा। इससे प्रयोगशाला की पढ़ाई केवल निर्धारित प्रायोगिक कार्य तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों के ज्ञान और शोध क्षमता को विकसित करने का माध्यम बनेगी।
“समय के साथ शिक्षा की जरूरतें भी बदलती हैं। शिक्षक स्वयं लगातार सीखते रहें, पाठ्यक्रम बदलती जरूरतों से जुड़े हों और कक्षा के साथ प्रयोगशाला में भी विद्यार्थियों को सीखने के पर्याप्त अवसर मिलें, यही हमारी दिशा है। हमारा प्रयास है कि विश्वविद्यालय से निकलने वाले विद्यार्थियों के पास डिग्री के साथ अद्यतन ज्ञान, व्यावहारिक कौशल और बदलती तकनीक की समझ भी हो।”
