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पूर्वांचल यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी होगी डिजिटल, छुट्टियों में भी घर बैठे ई-बुक्स और रिसर्च पेपर पढ़ सकेंगे छात्र

Published: Sat, 19 Sep 2026 03:52 PM (IST)Updated: Sat, 19 Sep 2026 04:00 PM (IST)

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय अब छुट्टियों में भी ई-लाइब्रेरी की सुविधा देगा, जिससे छात्र घर बैठे डिजिटल संसाधनों का उपयोग कर सकेंगे।

पूर्वांचल यूनिवर्सिटी में छुट्टियों के दौरान भी जारी रहेगी पढ़ाई।

पूर्वांचल यूनिवर्सिटी में छुट्टियों के दौरान भी जारी रहेगी पढ़ाई।

HighLights

  1. ई-बुक, ई-जर्नल जैसे डिजिटल संसाधनों का दायरा बढ़ेगा।

  2. विद्यार्थी छुट्टियों में भी घर से सामग्री एक्सेस कर सकेंगे।

  3. पढ़ाई और शोध कार्य के लिए लाइब्रेरी खुलने का इंतजार नहीं।

जागरण संवाददाता, मल्हनी (जौनपुर)। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में अब लाइब्रेरी की सुविधा छुट्टियों और निर्धारित समय की सीमा से आगे ले जाने की तैयारी है। ई-बुक, ई-जर्नल, शोधपत्र और अकादमिक डेटाबेस जैसे डिजिटल संसाधनों का दायरा बढ़ाया जाएगा, ताकि विद्यार्थी और शोधार्थी विश्वविद्यालय या लाइब्रेरी में मौजूद न होने पर भी अधिकृत एक्सेस के जरिए जरूरी सामग्री पढ़ सकें। इसके लिए उपलब्ध ई-संसाधनों की समीक्षा और उन्हें विद्यार्थियों तक पहुंचाने की प्रक्रिया पर काम शुरू किया जा रहा है।

साप्ताहिक अवकाश, त्योहारों या लंबे अवकाश में लाइब्रेरी बंद रहने के दौरान भी विद्यार्थी घर से उपलब्ध डिजिटल सामग्री का उपयोग कर सकेंगे। परीक्षा की तैयारी में किसी विषय की संदर्भ सामग्री की जरूरत हो या शोधार्थी को किसी शोधपत्र अथवा जर्नल की आवश्यकता पड़े, उसे लाइब्रेरी खुलने का इंतजार नहीं करना होगा।

डिजिटल संसाधनों में पाठ्यक्रम से संबंधित ई-बुक के साथ शोध पत्रिकाएं, शोधपत्र, संदर्भ सामग्री और अकादमिक डेटाबेस शामिल किए जाएंगे। ई-संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ विद्यार्थियों को इनके इस्तेमाल की जानकारी देने पर भी जोर रहेगा।

उन्हें उपलब्ध डिजिटल संसाधनों, अधिकृत एक्सेस की प्रक्रिया और अध्ययन व शोध में उनके उपयोग के बारे में बताया जाएगा। इससे केवल संसाधन उपलब्ध कराने के बजाय उनका वास्तविक उपयोग बढ़ाने में मदद मिलेगी।

पूर्व में विश्वविद्यालय पुस्तकालय का संचालन समय बढ़ाकर शाम आठ बजे तक किया गया था। अब डिजिटल संसाधनों का दायरा बढ़ने से पुस्तकालय की सुविधा को समय और स्थान की सीमा से आगे ले जाने की दिशा में काम होगा।

पुस्तकालय अब केवल मुद्रित पुस्तकों तक सीमित नहीं रह सकता। जरूरत के अनुसार प्रमाणिक डिजिटल सामग्री उपलब्ध कराना जरूरी है। इससे अवकाश के दौरान भी विद्यार्थी अपनी पढ़ाई और शोध का काम जारी रख सकेंगे। -प्रो. राकेश कुमार सिंह, कुलपति, पूविवि।