विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

जौनपुर में PM कृषि सिंचाई योजना से बदलेगी किसानों की तकदीर, 12520 हेक्टेयर बंजर जमीन बनेगी उपजाऊ

Published: Mon, 07 Sep 2026 02:28 PM (GMT+05:30)

जौनपुर में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-3.0 के तहत 12,520 हेक्टेयर से अधिक बंजर भूमि को उपजाऊ बनाया जाएगा।

यह तस्वीर AI जेनेरेटेड है

यह तस्वीर AI जेनेरेटेड है

HighLights

  1. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-3.0 के तहत भूमि सुधार।

  2. जौनपुर में 12,520 हेक्टेयर बंजर भूमि होगी उपजाऊ।

  3. रामपुर और सुजानगंज के 100 गांव शामिल हैं।

जागरण संवाददाता, जौनपुर। जिले में वर्षा जल पर निर्भर रहने वाले किसानों की तकदीर बदलने और कृषि उत्पादन को रफ्तार देने के लिए भूमि संरक्षण विभाग ने एक बड़ा खाका तैयार किया है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-3.0 के तहत जौनपुर की 12,520 हेक्टेयर से अधिक बंजर व प्रभावित भूमि को सुधारकर उपजाऊ बनाया जाएगा।

इस विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) की समीक्षा और योजना को अंतिम रूप देने के लिए सोमवार को लखनऊ स्थित भू-मित्र भवन में एक अहम बैठक बुलाई गई है। बैठक में शामिल होने के लिए जौनपुर के दोनों भूमि संरक्षण अधिकारी अद्यतन अभिलेखों और सर्वे आंकड़ों के साथ शामिल हुए।

राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी (परती भूमि विकास विभाग) द्वारा मुख्य कार्यकारी अधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में डब्लूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0 की प्रगति समीक्षा के साथ-साथ पीएमकेएसवाई 3.0 के तहत नए क्षेत्रों के चयन व डीपीआर पर मुहर लगाई जाएगी।

रामपुर के 43 और सुजानगंज के 57 गांव शामिल

योजना के तहत जिले के दो विकास खंडों रामपुर और सुजानगंज का चयन किया गया है। प्राथमिक सर्वे के अनुसार रामपुर ब्लाक के 43 गांवों में 6,555 हेक्टेयर भूमि का डीपीआर भूमि संरक्षण अधिकारी प्रथम द्वारा तैयार किया गया है। वहीं सुजानगंज विकास खंड के 57 गांवों की 5,965 हेक्टेयर भूमि के सुधार के लिए भूमि संरक्षण अधिकारी द्वितीय द्वारा रिपोर्ट भेजी गई है।

अगले पांच वर्षों तक चलने वाली इस योजना में उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां संसाधनों के अभाव में फसलें दम तोड़ देती हैं। विभाग द्वारा वहां सिंचाई व जल संचयन के जरूरी संसाधन मुहैया कराए जाएंगे। योजना के तहत बारिश के पानी को सहेजकर भूमिगत जलस्तर बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा संरक्षित जल का उपयोग मछली पालन और फसलों की सिंचाई में होगा।

माइक्रो वाटर शेड से रुकेगा मिट्टी का कटान

चयनित विकास खंडों में जल संरक्षण के लिए माइक्रो वाटर शेड का निर्माण किया जाएगा। एक वाटर शेड के जरिए 400 से 500 हेक्टेयर क्षेत्र के बारिश के पानी को सहेजा जाएगा। इससे ढलान वाली भूमि से मिट्टी का कटान रुकेगा, जिससे खेतों की प्राकृतिक उर्वरा शक्ति नष्ट नहीं होगी।

यह भी पढ़ें- जौनपुर में बिजली आपरेटर को पीटने व रजिस्टर फाड़ने के आरोप में सिपाही लाइन हाजिर

योजना को पारदर्शिता और प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जनपद स्तर पर 'वाटर शेड सेल कम डाटा सेंटर' (डब्ल्यूसीडीसी) और 'वाटर शेड डेवलपमेंट टीम' (डब्ल्यूडीटी) का गठन किया जाएगा। ये समितियां संसाधनों के अति-शोषण को रोकने, भूजल स्तर बनाए रखने, बाढ़ व प्रदूषण नियंत्रण, अवसादन की जांच और वन्यजीव संरक्षण जैसे कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करेंगी।

डब्लूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0 की प्रगति समीक्षा के साथ-साथ पीएमकेएसवाई 3.0 के तहत नए क्षेत्रों के चयन व डीपीआर को अंतिम रूप देने के लिए सोमवार को लखनऊ में समीक्षा बैठक हुई। स्वीकृति मिलने के साथ ही योजना का शुभारंभ हो जाएगा।

                                                                          कवलजीत सिंह, भूमि संरक्षण अधिकारी