जागरण संवाददाता, जौनपुर : सब कुछ वही, वही प्रार्थना स्थल, वही मंच, वही ईसाई मिशनरी का स्थल, लेकिन अलसुबह नजारा जुदा था। जहां रो•ा हाथों में बाइबिल लेकर उपदेश दिया जाता था, लोग हाथ खड़े कर हलेलुइया-हलेलुइया पुकारते थे। वहां रविवार की सुबह हाथों में भगवा और •ाुबान पर जय श्री राम का नाम था। ईसाइयत का बोल-बाला करने वालों को खदेड़ कर सनातन धर्म का परचम लहरा रहा था। ये तब हुआ जब चंदवक थानांतर्गत भूलनडीह गांव में धधक रही धर्म परिवर्तन की आग प्रशासन प्रशासन नहीं बुझा सका। नाउम्मीद क्षत्रिय महासभा और दूसरे हिन्दू संगठनों ने खुद बीड़ा उठाया। इसके बाद तो वहां हालात ही बदल गए।

डोभी ब्लाक अन्तर्गत भूलनडीह समय कई गांव में छल और लोभ के बल पर भोले-भाले लोगों को ईसाइयत की ओर धकेलने का गोरखधंधा 11 वर्षों से चल रहा है। इसको लेकर ¨हदू संगठनों का पारा चढ़ा हुआ था। संवैधानिक तरीके से प्रशासन के सामने गुहार लगाई, लेकिन वहां से ठेंगा दिखा दिया गया। इधर गोरखधंधे के खिलाफ दैनिक जागरण ने भी आवा•ा बुलंद की। मुकदमे दर्ज हुए लेकिन मुख्य पादरी व संचालक दुर्गा प्रसाद यादव की परछाईं भी पुलिस नहीं देख सकी। इससे लोगों में असंतोष बढ़ता गया। आखिरकार रविवार को अक्रोश का ज्वालामुखी फूट पड़ा। हाथों में भगवा झंडा और जय श्रीराम का नारा लगाते हुए सैकड़ों लोग चर्च में दाखिल हो गए। वहां मौजूद दुर्गा यादव के का¨रदों को माहौल भांपते देर न लगी। सभी वहां जुट कर पुलिस के सामने ही विरोध पर उतर आए। पथराव भी किया। हालांकि

इसके बाद सभी निकल भागे। देखते ही देखते प्रार्थना सभा जहां मिशनरी की सत्ता चलती थी, लोगों को एक दूसरे से बात करने और मोबाइल ले जाने की अनुमति नहीं थी, वहां न•ारा बदल गया था। ¨हदू संगठन के कार्यकर्ता डीजे पर भजन-कीर्तन करते वहां दिखाई दिये। मौके की नजाकत देख सुबह से ही पुलिस, पीएसी बल ने गांव को छावनी में तब्दील कर रखा था। प्रदर्शनकारी काफी देर तक इस •िाद पर अड़े रहे कि कथित चर्च को अभी सील किया जाए। समझाने पर मान तो गए, लेकिन ये चेतावनी भी देते गए कि मंगलवार और उसके बाद यहां प्रार्थना न हो।

Posted By: Jagran