जासं, केराकत(जौनपुर): गोमती नदी का जलस्तर मंगलवार की रात से तेजी से बढ़ना शुरू हुआ, जो अभी तक बरकरार है। जलस्तर बढ़ने से गोमती नदी के तटीय इलाके पूरी तरह से जलमग्न हो गए। कई एकड़ फसल पानी में डूब गई हैं। पौधरोपण किए गए पौधे भी जल में समा गए। वहीं कुछ किसानों के रिहायशी मड़हों में भी पानी पहुंच गया। प्रशासन अभी तक कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है।

गोमती नदी के तटीय इलाकों में सरोजबड़ेवर, नोनमठिया, भितरी, गोपालपुर, जोखुवाना, चकरारेत, नरहन, मसौड़ा, बेहड़ा आदि गांवों में पानी भर गया। जिससे वहां रहकर जीवन-यापन करने वाले रामासरे, प्यारे, महेन्द्र, गोपाल, झगड़ू, धर्मराज, सुरेश आदि लोगों का मड़हों में पानी पहुंच गया। इन लोगों ने अपने जानवरों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया। मड़हे में रखा गया सामान आदि जलमग्न हो गए। इनके साथ ही हौसिला, सोचन, केदार, पंचम, बेचू, नन्दा आदि की फसल जलमग्न हो गई। जलमग्न होने वाली फसलों में धान, बजड़ी, मक्का, चरी व सब्जियां शामिल है। किसानों के अनुसार उनकी लाखों की लागत जल में समा गई। नदी के किनारे रहने वाले प्यारे ने बताया कि मंगलवार की रात हम लोगों के लिए प्रलयकारी रही। पांच साल बाद ऐसी स्थिति आई कि फसल के साथ-साथ मड़हे भी जलमग्न हो गए हैं।

उधर, चंदवक घाट, चवरवर, बरमलपुर, बलुआ, बरौटी आदि गावों के कुछ घरों के चौखट पर पानी ने दस्तक दे दिया है। गोमती नदी का जल स्तर इस समय स्थिर बताया जा रहा है। चंदवक घाट पर जमुना प्रसाद गोस्वामी, राधेश्याम नाविक, कमला नाविक, दिनेश नाविक के दरवाजे पर बाढ़ के पानी ने दस्तक दे दी है।

Posted By: Jagran