वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय परिसर में खाली सीटों से बढ़ी मांग तक पहुंचा पूविवि कैंपस
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में पिछले तीन वर्षों में छात्र संख्या 3300 से बढ़कर लगभग 6000 हो गई है। ...और पढ़ें

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में छात्र संख्या दोगुनी, शैक्षणिक सुधारों से बढ़ी मांग।
HighLights
तीन वर्षों में छात्र संख्या 3300 से 6000 हुई।
कुलपति प्रो. वंदना सिंह के कार्यकाल में सुधार।
नए पाठ्यक्रमों और नियमित कक्षाओं से प्रवेश में वृद्धि।
जागरण संवाददाता, मल्हनी (जौनपुर)। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय परिसर में पिछले तीन वर्षों में शैक्षणिक गतिविधियों और प्रवेश के रुझान में बदलाव दिखाई दिया है। करीब तीन वर्ष पहले परिसर में संचालित स्नातक, स्नातकोत्तर और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की संख्या लगभग 3300 थी। कई पाठ्यक्रमों में निर्धारित सीटें पूरी नहीं भर पाती थीं।
अब छात्र संख्या छह हजार के करीब पहुंच गई है। कुछ पाठ्यक्रमों को छोड़ दें तो अधिकांश में सीटें भर रही हैं। कई पाठ्यक्रमों में सीमित सीटों के कारण प्रवेश के इच्छुक विद्यार्थियों को अवसर नहीं मिल पा रहा है। कुलपति प्रो. वंदना सिंह के कार्यकाल में शैक्षणिक व्यवस्था को नियमित करने पर जोर दिया गया। कक्षाओं के समय से संचालन, शिक्षकों की उपस्थिति और निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार पढ़ाई कराने को लेकर निगरानी बढ़ाई गई।
शिक्षकों के समय से परिसर आने-जाने और अवकाश के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने पर जोर रहा। कक्षा और शैक्षणिक गतिविधियों की नियमितता को लेकर विभागों की जवाबदेही भी बढ़ी।विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने में नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत भी महत्वपूर्ण रही। बीएससी एग्रीकल्चर, बीपीइएस सहित कई डिग्री और डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू किए गए।
इनके संचालन के लिए अतिथि और संविदा शिक्षकों की नियुक्तियां हुईं। सीटों में वृद्धि के बाद भी कई पाठ्यक्रमों में प्रवेश क्षमता पूरी हो गई। हालांकि सभी पाठ्यक्रमों में एक जैसी स्थिति नहीं है और कुछ स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में सीटें अब भी रिक्त रह जाती हैं। शोध और संबद्ध महाविद्यालयों के स्तर पर भी गतिविधियां बढ़ी हैं।
विश्वविद्यालय में पीएचडी उपाधि प्राप्त करने वाले शिक्षकों की संख्या पहले की तुलना में लगभग दोगुनी हुई है। विश्वविद्यालय से जुड़े शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कर्मचारियों और शिक्षकों का सहयोग इसी तरह मिलता रहा तो अगले सत्र में परिसर की छात्र संख्या सात से आठ हजार तक पहुंच सकती है।
विश्वविद्यालय ने वाराणसी को छोड़कर आसपास के 10-12 जिलों में राजस्व संग्रह के मामले में भी अपनी स्थिति मजबूत की है। हालांकि छात्र संख्या बढ़ने के साथ शैक्षणिक संसाधनों, शिक्षकों, कक्षाओं और प्रयोगशालाओं की पर्याप्त व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी होगा।
कुलपति प्रो. वंदना सिंह का कार्यकाल 25 अगस्त को समाप्त हो रहा है। तीन वर्षों में छात्र संख्या में हुई वृद्धि, नए पाठ्यक्रमों का विस्तार और शैक्षणिक गतिविधियों में बढ़ोतरी अब विश्वविद्यालय के सामने अगली चुनौती भी रखती है—बढ़ते प्रवेश के साथ गुणवत्ता और व्यवस्थागत क्षमता में समान गति बनाए रखना।
