जौनपुर में भादो छठ मेले में जुटेंगे किसान, सजेंगे कृषि यंत्रों और वाहनों के स्टॉल
जौनपुर के रायख्वाजा क्षेत्र में 20 अगस्त को ऐतिहासिक भादो छठ मेला आयोजित होगा, जिसकी तैयारियां पूरी कर ली गई ...और पढ़ें

जौनपुर में भादो छठ मेला: कृषि यंत्रों के स्टॉल और सूरजकुंड में स्नान का विशेष महत्व।
HighLights
जौनपुर में 20 अगस्त को ऐतिहासिक भादो छठ मेले का आयोजन।
सूरजकुंड तालाब में स्नान का विशेष धार्मिक महत्व, तैयारियां पूर्ण।
कृषि उपकरणों, वाहनों के स्टॉल और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
जागरण संवाददाता, मल्हनी (जौनपुर)। रायख्वाजा क्षेत्र का ऐतिहासिक भादो छठ मेला 20 अगस्त को मुख्य रूप से आयोजित होगा। मेले की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सूरजकुंड तालाब की साफ-सफाई कराने के साथ श्रद्धालुओं के स्नान के लिए बैरिकेडिंग की गई है। मेले में कृषि उपकरणों के साथ विभिन्न कंपनियों के उत्पाद और रोजमर्रा की जरूरत के सामान के स्टॉल सजने लगे हैं। दो-तीन दिन तक चलने वाले मेले में बड़ी संख्या में किसान और श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
भादो छठ मेले में सूरजकुंड में स्नान का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि सूरजकुंड तालाब में स्नान करने से चर्म जैसी बीमारियां दूर होती हैं। इसी आस्था के चलते जौनपुर के अलावा दूसरे जिलों और कई राज्यों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मुख्य मेले के दिन सुबह चार बजे से ही तालाब में स्नान का क्रम शुरू होने की संभावना है।श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए तालाब के आसपास आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।
यह मेला किसानों के लिए कृषि उपकरणों की खरीदारी का प्रमुख केंद्र भी माना जाता है। विभिन्न बड़ी कंपनियों के ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल और कृषि यंत्रों के स्टॉल के साथ छोटे-बड़े दुकानदार भी दुकानें लगाते हैं। कृषि उपकरणों के अलावा घरेलू उपयोग की वस्तुएं, खिलौने, खान-पान और अन्य छोटे-मोटे सामान भी मेले में उपलब्ध रहते हैं।
मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं, जिससे धार्मिक आस्था के साथ मनोरंजन का माहौल भी रहता है।मेले के दौरान बढ़ती भीड़ को देखते हुए यातायात व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा। मुख्य दिन सड़क पर वाहनों का दबाव बढ़ने पर सिद्धीकपुर और कोइरीडीहा की ओर से रूट डायवर्जन किया जाएगा। पहले दिन यातायात को डायवर्ट रखने की व्यवस्था रहेगी, जबकि बाद में स्थिति सामान्य होने पर आवागमन बहाल किया जाएगा।
सड़क की दोनों पटरियों पर करीब तीन किलोमीटर तक सफाई भी कराई गई है।पहले यह मेला मुख्य आयोजन से करीब एक सप्ताह पहले ही शुरू हो जाता था और कई दिनों तक चलता था। पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं होने के कारण अब मुख्य आयोजन सीमित अवधि में सिमट गया है, हालांकि कृषि यंत्रों और अन्य सामान की खरीदारी के लिए बाजार दो-तीन दिन तक लगा रहता है।ग्राम प्रशासक रैना सिंह की ओर से मेले की तैयारियों के तहत सड़क किनारे सफाई कराई गई है।
