जागरण संवाददाता, जौनपुर : मुख्यमंत्री द्वारा निर्धारित तिथि में बेसहारा बेजुबानों को आश्रय देने में जिला प्रशासन फेल हो गया। शासन द्वारा इसके लिए अब 31 जनवरी तक समय सीमा बढ़ा दी गई है। जिसे लेकर किसानों में आक्रोश बढ़ने लगा है। उनका कहना है कि जब ठूंठ हुई फसल भी नहीं बचेगी तो व्यवस्था करके क्या फायदा होगा।

भीषण ठंड में किसान रतजगा करके फसलों की रखवाली कर रहे हैं। इसके बाद भी पलक झपकते ही बेसहारा पशु समूह में लहलहाती फसल को बर्बाद कर दे रहे हैं। उन्हें खेत से बाहर करने में पसीने छूट रहे हैं तो कई लोग घायल भी हो जा रहे हैं। मुख्यमंत्री द्वारा 10 जनवरी तक विचरण कर रहे पशुओं को आश्रय केंद्र तक पहुंचाने का फरमान जारी होने के बाद किसानों ने राहत की सांस ली थी। लेकिन व्यवस्था न होने के हवाला देते हुए तिथि बढ़ाने से उनकी बेचैनी बढ़ गई है। अन्नदाताओं का कहना है कि एक बार फसल चरकर ठूंठ कर दिए थे। अब दोबारा निकल रहे कल्ले को भी अब नहीं छोड़ रहे हैं। जब कुछ बचेगा ही नहीं तो पशुओं को पकड़ने के क्या फायदा होगा। आखिर कब थमेगा अन्नदाताओं का आक्रोश

बेसहारा पशुओं द्वारा मेहनत व कर्ज लेकर उगाई गई फसलों को बर्बाद होता देख पूर्वांचल के किसानों का धैर्य जवाब दे गया है। आदेश के बाद भी ब्लाक मुख्यालयों पर पशु आश्रय केंद्र न खोले जाने और जिला प्रशासन द्वारा ठोस पहल होने से वह एक माह आंदोलन की राह पकड़ लिए हैं। कहीं पशुओं के साथ रास्ता जाम व प्रदर्शन कर रहे तो कहीं प्राथमिक विद्यालयों को पशुशाला बना दे रहे हैं। विरोध करने वाली पुलिस से भी वह संघर्ष पर उतारू हो रहे हैं। जौनपुर में इसकी शुरूआत तीन दिसंबर को जफराबाद के नेवादा गांव से हुई। ग्रामीणों ने करीब 80 पशुओं को प्राथमिक विद्यालय परिसर में बंद कर दिया। इसके बाद तो सिलसिला ही चल पड़ा। सिकरारा क्षेत्र के सुरुआरपट्टी, बीबीपुर, बक्शा के सुजियामऊ, पूराहेमू, मई, उमरछा, ¨सगरामऊ के मल्लूपुर, बरसठी के सहरमा, मछलीशहर के दियावां, बदलापुर के डुहिया, जलालपुर के बनपुरवा, मरहीं, चंदवक के भैंसा, सिरकोनी के गोपीपुर, थानागद्दी के नाऊपुर, सुजानगंज के बराईं, मीरगंज के लासा और बरईपार क्षेत्र के नेवढि़या गांव में पशुओं को पकड़कर विद्यालय परिसर में बंद किया गया। अस्थाई पशु आश्रय केंद्र के लिए 30 स्थान चिन्हित किए गए हैं। इनमें शाहगंज, सुजानगंज, मड़ियाहूं के गोशाला, मुफ्तीगंज के रामपुर, जलालपुर के चौरी बाजार स्थित पशु मेला स्थल पर पशुओं के खिलाने आदि की भी व्यवस्था है। केयर टेकर की व्यवस्था होते ही विचरण कर रहे पशुओं को पकड़कर आश्रय स्थल पर पहुंचा दिया जाएगा।

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