जौनपुर में 357 वर्ष बाद एक-दूसरे से मिला कुनबा, ब्राह्मण परिवार में कुछ हो चुके थे मुस्लिम, नौशाद अहमद दुबे के घर हुआ भोजभात
जौनपुर के डेहरी गांव में 357 साल बाद एक ही कुल के बिछड़े लोगों का भावुक मिलन हुआ, जिनमें से ...और पढ़ें

जौनपुर में 357 साल बाद एक हुए बिछड़े परिवार, ब्राह्मण और मुस्लिम सदस्यों का भावुक मिलन।
HighLights
357 वर्ष बाद जौनपुर में बिछड़े परिवार का भावुक मिलन हुआ।
मुगल शासक औरंगजेब के दौर में अलग हुए थे कुछ सदस्य।
नौशाद अहमद दुबे के घर पर हुआ यह ऐतिहासिक भोजभात।
जागरण संवाददाता, जौनपुर। केराकत क्षेत्र के डेहरी गांव में शनिवार को एक ही कुल के बिछड़े लोगों का 357 वर्ष बाद मिलन भावुक कर देने वाला रहा। बताया गया कि वर्ष 1669 में मुगल शासक औरंगजेब के दौर में परिस्थितियों के कारण अलग हुए एक खानदान के लोग करीब 357 वर्ष बाद एक-दूसरे से मिले।
काशी और जौनपुर से पहुंचे ब्राह्मण परिवार के लोगों ने नौशाद अहमद दुबे के घर भोजभात किया और उन्हें अपने कुल का बड़ा मानते हुए सम्मानित किया। विशाल भारत संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष नौशाद अहमद दुबे ने बताया कि उनसे आठ पीढ़ी पहले पूर्वज लाल बहादुर दुबे रानी की सराय, आजमगढ़ के रहने वाले थे।
उस दौर की परिस्थितियों में उनके पूर्वजों ने इस्लाम स्वीकार कर लिया और रानी की सराय छोड़कर डेहरी में आकर बस गए। उनके अनुसार लाल बहादुर दुबे जमींदार थे और उन्होंने हजारी सिंह से डेहरी की जमींदारी खरीदी थी।
परिवार के अन्य सदस्य और रिश्तेदार अलग-अलग स्थानों पर चले गए। पीढ़ियां गुजरती रहीं, लेकिन बिछड़े परिवारों का आपस में मिलना नहीं हो सका।
नौशाद अहमद दुबे की बेटी की शादी के कार्ड पर ‘दुबे’ उपनाम प्रकाशित होने के बाद इस परिवार की चर्चा हुई। इसके बाद पूर्वजों की जानकारी जुटाने पर काशी और जौनपुर समेत पूर्वांचल में कई रिश्तेदारों का पता चला।
विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं इतिहासकार डा. राजीव श्रीगुरु और उनकी शोध टीम ने करीब चार वर्ष तक परिवार की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया। इसी क्रम में बिछड़े रिश्तेदारों को भोजभात के लिए डेहरी बुलाया गया।
