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पूर्वांचल विश्वविद्यालय पहुंचे नरेंद्र देव कृषि विवि के निदेशक शोध, कहा - 'कृषि शोध को दें नई दिशा'

By khalid shah Edited By: Abhishek sharma
Published: Thu, 01 Oct 2026 05:06 PM (IST)

प्रो. उमेश चंद्रा ने कृषि शिक्षा को प्रयोगशाला, खेत और बाजार की जमीनी जरूरतों से जोड़ने पर जोर दिया, ताकि ...और पढ़ें

कृषि शिक्षा को जमीनी जरूरतों से जोड़कर उद्यमिता बढ़ाएं: प्रो उमेश चंद्रा

कृषि शिक्षा को जमीनी जरूरतों से जोड़कर उद्यमिता बढ़ाएं: प्रो उमेश चंद्रा

जागरण संवाददाता, मल्हनी (जौनपुर)। "कृषि शिक्षा को महज कक्षाओं की चारदीवारी तक सीमित न रखकर प्रयोगशाला, खेत और बाजार की जमीनी जरूरतों से जोड़ना आज के दौर की सबसे बड़ी मांग है।विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा, तभी उनके भीतर छिपी उद्यमिता और स्वरोजगार की संभावनाएं साकार होंगी।"

यह बातें आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज (अयोध्या) के कीट विज्ञान विभाग के प्रोफेसर एवं निदेशक शोध प्रो. उमेश चंद्रा ने कहीं।वह गुरुवार को वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय परिसर स्थित महर्षि पराशर कृषि विज्ञान संस्थान में शैक्षणिक व शोध गतिविधियों का जायजा लेने पहुंचे थे।

संस्थान के भ्रमण के दौरान प्रो. चंद्रा ने शिक्षकों के साथ बैठक कर पठन-पाठन, प्रयोगात्मक कार्यों और भविष्य की कार्ययोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में तेजी से आ रहे बदलावों को देखते हुए शोध की दिशा में नवाचार बेहद जरूरी है। विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्होंने कीट प्रबंधन, उन्नत उत्पादन तकनीक और व्यावहारिक कृषि से जुड़े कई महत्वपूर्ण सूत्र साझा किए।

निदेशक शोध ने संस्थान में चल रहे दो दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण शिविर का निरीक्षण भी किया। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से सीधी बातचीत कर मशरूम उत्पादन की बारीकियों और व्यावसायिक संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने व्यवस्थित ढंग से चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि ऐसे व्यावहारिक शिविर युवाओं को नौकरी तलाशने वाले के बजाय नौकरी देने वाला (कृषि उद्यमी) बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे।

इस दौरान कीट विज्ञान विभाग के डॉ. सत्यम प्रजापति, उद्यान विज्ञान से डॉ. विपिन, सस्य विज्ञान से डॉ. हरिवंश सिंह, कृषि प्रसार से डॉ. प्रदीप कुमार यादव तथा पादप विज्ञान विभाग के डॉ. शुभम सिंह ने अपने-अपने विभागों की शोध व प्रयोगात्मक गतिविधियों की जानकारी दी। अंत में समस्त शिक्षकों ने निदेशक शोध का आभार व्यक्त किया।