भ्रामक सूचनाओं से प्रभावित हो रही सोचने-समझने की क्षमता, साइबर अपराध से मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ रहा खतरा
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर पूर्वांचल विश्वविद्यालय में साइबर अपराधों के मनोवैज्ञानिक प्रभावों पर संगोष्ठी हुई। विशेषज्ञों ने डिजिटल धोखाधड़ी, ...और पढ़ें

साइबर अपराधों का मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव: जागरूकता ही बचाव।
HighLights
साइबर अपराधों से मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव।
डिजिटल युग में भ्रामक सूचनाओं से सतर्क रहने की अपील।
जागरूकता और डेटा सुरक्षा साइबर हमलों से बचाव का मार्ग।
जागरण संवाददाता, मल्हनी (जौनपुर)। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर शनिवार को दत्तोपंत ठेंगड़ी विधि संस्थान के सभागार में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। ‘डिजिटल युग में साइबर अपराधों का मनोवैज्ञानिक प्रभाव : रोकथाम, जागरूकता एवं सहायता’ विषयक संगोष्ठी में साइबर अपराध, ऑनलाइन उत्पीड़न और डिजिटल धोखाधड़ी के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की गई।
विश्वविद्यालय के व्यावहारिक मनोविज्ञान विभाग, वेलनेस सेंटर और साइबर क्लब के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने और भ्रामक सूचनाओं से सतर्क रहने की अपील की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने कहा कि साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और इनका लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। डिजिटल दुनिया में किसी परिचित चेहरे या जानी-पहचानी आवाज पर भी आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए।
साइबर अपराधी विद्यार्थियों की फीस से लेकर लोगों की जीवनभर की बचत और बुजुर्गों की पूरी कमाई तक हड़प रहे हैं। ऐसे में जागरूकता ही साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है।उन्होंने कहा कि स्वयं साइबर अपराधों से सुरक्षित रहने के साथ ही परिवार के सदस्यों को भी जागरूक करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।
इससे लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ ही मानसिक तनाव और परेशानी से बचाने में मदद मिल सकती है।मुख्य अतिथि और साइबर अपराध विशेषज्ञ डॉ. अनुप गिरधर ने कहा कि साइबर ठगी, ऑनलाइन उत्पीड़न और भ्रामक सूचनाओं के कारण लोग तनाव, भय और मानसिक परेशानी का सामना कर रहे हैं।
डिजिटल माध्यमों पर भ्रामक सूचनाओं और वीडियो के जरिए लोगों की सोचने-समझने तथा सही-गलत का निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने इसे ‘ब्रेन हैकिंग’ की संज्ञा देते हुए डिजिटल सामग्री के प्रति सतर्क रहने की जरूरत बताई।डॉ. गिरधर ने कहा कि सोशल मीडिया पर किसी भी सूचना, वीडियो या संदेश को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करनी चाहिए।
बिना पुष्टि के किसी सामग्री को आगे भेजने से बचें और तथ्यों की पड़ताल के बाद ही निर्णय लें। उन्होंने डेटा सुरक्षा के साथ मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने पर भी जोर दिया।कार्यक्रम में संयोजक प्रो. अजय प्रताप सिंह ने विषय प्रवर्तन किया। आयोजन सचिव डॉ. अन्नू त्यागी ने साइबर अपराध और काउंसलिंग के महत्व पर विचार व्यक्त किए।
सह-संयोजक डॉ. जाह्नवी श्रीवास्तव के निर्देशन में व्यावहारिक मनोविज्ञान विभाग के विद्यार्थियों ने नाटक प्रस्तुत कर साइबर जागरूकता का संदेश दिया। डॉ. जाह्नवी श्रीवास्तव और डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने धन्यवाद ज्ञापित किया।इस अवसर पर प्रो. मनोज मिश्र, प्रो. अविनाश, प्रो. सौरभ पाल, प्रो. गिरिधर मिश्र, प्रो. विनोद कुमार, डॉ. दिव्येंदु मिश्र, डॉ. सुरेंद्र यादव सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
