जागरण संवाददाता, जौनपुर : जनपद में उर्वरकों की अधिक मूल्य पर बिक्री और कालाबाजारी का सच सामने आ गया है। किसानों की शिकायत पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने जांच कराई तो भारी अनियमितता मिली। उन्होंने जिला कृषि अधिकारी को दुकानों का लाइसेंस निरस्त कर उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई के लिए पत्र भेजा है।

जनपद में खाद की कालाबाजारी और अधिक मूल्य पर बिक्री का खेल लंबे समय से चला आ रहा है। इफको की डीएपी व यूरिया का आवंटन जहां मनमाने ढंग से किया जा रहा है वहीं कुछ औद्यानिक समितियां तय मूल्य से अधिक मूल्य पर बिक्री कर लाखों का वारा-न्यारा कर रही हैं। प्राइवेट दुकानों पर तमाम अनियमितताएं हैं जिसका खामियाजा किसानों को भुगतान पड़ रहा है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट हिमांशु नागपाल ने बताया कि नायब तहसीलदार विक्रम पासवान ने कृषक सेवा केंद्र गौराबादशाहपुर की आकस्मिक जांच की।

निरीक्षण के दौरान दैनिक खरीद रजिस्टर में प्रतिनिधि का क्रय अंकित नहीं किया गया था। साथ ही कुछ किसानों से टेलीफोन पर वार्ता की गई तो बताया कि खाद के निर्धारित 266 रुपये से अधिक 300 से 320 रुपये लिया गया। कृषक सेवा केंद्र सहित कई दुकानों पर रेट बोर्ड चस्पा नहीं किया गया था। ई-पास मशीन से स्टाक की स्थिति की जांच की तो 13 जनवरी का स्टाक में डीएपी 96 बोरी की जगह 100 बोरी और एमओपी 522 बोरी की जगह 245 बोरी मिली।

निरीक्षण की सूचना पर गौराबादशाहपुर क्षेत्र की अधिकांश उर्वरक की दुकानें बंद मिलीं। यह सब दुकानदार को संदेहास्पद बनाता है। इसी क्रम में नायब तहसीलदार अजीत जायसवाल ने पराग पशु आहार सिरकोनी बाजार, जायसवाल खाद भंडार नत्थनपुर, आइएफडीसी कृषक सेवा केंद्र हूंसेपुर, दिलीप बीज भंडार इजरी की जांच की गई। दुकानों पर रेट बोर्ड उपलब्ध नहीं मिला। वहीं पराग पशु आहार सिरकोनी का लाइसेंस भी नहीं था। मौके पर डीएपी, यूरिया व भारी मात्रा में कीटनाशक मिला। एक दुकानदार बीज के लाइसेंस पर उर्वरक व कीटनाशक की बिक्री कर रहा था। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने जिला कृषि अधिकारी से संबंधित दुकानदारों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई के लिए पत्र भेजा है।

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