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जौनपुर के खुटहन में चकमार्ग निर्माण के लिए टावर पर चढ़ा व्‍यक्‍त‍ि तीन घंटे की मशक्‍कत के बाद उतरा

By amardeep srivastavaEdited By: Abhishek sharma
Published: Thu, 18 Jun 2026 11:25 AM (IST)

जौनपुर के खुटहन में एक किसान चकमार्ग निर्माण की मांग को लेकर मोबाइल टावर पर चढ़ गया। तीन घंटे के ...और पढ़ें

जौनपुर के खुटहन में चकमार्ग निर्माण के लिए किसान का टावर पर चढ़कर प्रदर्शन।

जौनपुर के खुटहन में चकमार्ग निर्माण के लिए किसान का टावर पर चढ़कर प्रदर्शन।

HighLights

  1. किसान ने चकमार्ग निर्माण की मांग पर टावर पर चढ़कर विरोध किया।

  2. प्रशासन ने काम शुरू करने का आश्वासन दिया, तब किसान नीचे उतरा।

  3. यह घटना स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है।

जागरण संवाददाता, जौनपुर। खुटहन के शेख असरखपुर गांव में चकमार्ग निर्माण की मांग को लेकर एक किसान ने गुरुवार को मोबाइल टावर पर चढ़कर विरोध प्रदर्शन किया। किसान सतीश कुमार यादव ने चेतावनी दी कि यदि चकमार्ग का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो वह टावर से कूदकर आत्महत्या कर देगा।

सतीश का आरोप है कि गांव के मुख्य मार्ग से जुड़े लगभग 400 मीटर लंबे चकमार्ग को कुछ चकदारों ने जोतकर अपने खेतों में मिला लिया है। उन्होंने कहा कि वह पिछले एक वर्ष से चकमार्ग को खाली कराने के लिए ब्लाक मुख्यालय से लेकर शाहगंज तहसील तक अधिकारियों के पास जा चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

सतीश ने बताया कि राजस्व कर्मियों ने कई बार आश्वासन दिया, लेकिन मौके पर मापी नहीं की गई। सुबह लगभग सात बजे, सतीश ने नहर के पास स्थित मोबाइल टावर पर लगभग 50 फीट की ऊंचाई पर चढ़ गए। उनकी इस हरकत की सूचना मिलते ही एसडीएम शाहगंज कुणाल गौरव, क्षेत्राधिकारी गिरेंद्र सिंह, नायब तहसीलदार, लेखपाल, पुलिस बल और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई। फायर ब्रिगेड के कर्मियों ने सुरक्षा के लिए टावर के नीचे जाल और गद्दे बिछा दिए।

करीब तीन घंटे तक टावर पर चढ़े रहने के बाद, जब चकमार्ग की पैमाइश कराकर बैकहो लोडर से निर्माण कार्य शुरू कराया गया, तब सतीश नीचे उतरे। इस घटना के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली। सतीश ने कहा कि वह अपने गांव के विकास के लिए लड़ाई जारी रखेंगे और जब तक चकमार्ग का निर्माण नहीं होता, तब तक वह चुप नहीं बैठेंगे।

इस घटना ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन समय पर कार्रवाई करता, तो इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। सतीश की इस साहसिक कदम ने गांव के अन्य किसानों को भी प्रेरित किया है कि वे अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं।इस प्रकार की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की कमी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण किसानों को किस प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।