जागरण संवाददाता, उरई : जिले के ईडीएम (ई डिस्ट्रिक्ट मैनेजर) पुष्पेंद्र सिंह के काले कारनामों को सियासत की छतरी का सबसे बड़ा सहारा मिलता रहा। संविदा कर्मी के रुप में काम करने वाला एक साधारण कर्मचारी चंद दिनों में इस कदर ठाट दिखाने लगा मानो कोई आइएएस अफसर हो। इसके काले कारनामों को संरक्षण देने के लिए जिले के कुछ बड़े अफसर भी मेहरबान रहे। मसलन एक संविदा कर्मी को भी अफसरों जैसा आवास दिया गया। महंगाई भत्ता भी जबरन उठाता रहा। भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबे जिले के अफसर भी इसकी शिकायतों को एक सिरे से निपटाते रहे हैं।

जब मामला काफी गंभीर हो गया तो शासन स्तर तक पुष्पेंद्र की शिकायतें पहुंचने लगीं। स्वयं बुंदेलखंड विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष राजा बुंदेला ने इसकी शिकायत शासन स्तर पर की। जिले के ईडीएम पुष्पेंद्र सिंह के विरुद्ध शासन स्तर से गोपनीय जांच बैठाई गई हैं। इन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने दस विदुओं पर जांच रिपोर्ट तलब की है। ई टेंडरिग के जरिए करोड़ों का होने वाले खेल में पुष्पेंद्र सबसे बड़ा मोहरा माना जाता है। ऐसा शिकायतकर्ताओं का आरोप है। पुष्पेंद्र पर आरोप यह भी है कि जिले की सभी बैठकों में बराबर भाग लेता था। उसके आवास में आधा दर्जन से अधिक कर्मचारी नियुक्त किए गए थे। यह कर्मचारी लगातार इसकी खुशामद में लगे रहते थे। इसके विरुद्ध शिकायतों की जांच एडीएम कर रही हैं। हालांकि प्रकरण में प्रशासन पूरी तरह से लीपापोती कर रहा है।

इतने गंभीर आरोपों में बाद भी जिले के अफसर इसके बचाव में दिख रहे हैं। हालां कि जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन इस बात का दंभ दिखा रही हैं कि जांच पूरी तरह से पारदर्शी होगी। जानकार यह भी बता रहे हैं कि मामले में लखनऊ तक से अपडेट लिया जा रहा है। फोटो संख्या : 26

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