संवाद सहयोगी, माधौगढ़ : रबी की फसल की बोआई का समय शुरू हो गया लेकिन साधन सहकारी समितियों पर डीएपी खाद न होने से किसान खेतों की बोआई के लिए समितियों के चक्कर लगा रहे हैं। इसके साथ ही बोआई भी पिछड़ रही है।

समय से बरसात होने की वजह से किसान रबी की बोआई करने के लिए खेतों को जोत कर तैयार कर लिए थे। अब मटर, गेहूं, सरसों की किसान बोआई करना चाहते हैं लेकिन गोहन साधन सहकारी समिति व धमना साधन सहकारी समितियों पर खाद न होने से किसान परेशान हैं। किसानों का कहना है कि फसलों की बोवाई करने के लिए खाद की जरुरत है लेकिन खाद न मिलने से खेतों की बोआई नहीं हो पा रही है। जब भी सहकारी समितियों पर खाद लेने के लिए जाते हैं तो सचिव द्वारा कह दिया जाता है कि एक या दो दिन में खाद आ जाएगी। खाद न मिलने से किसान इधर-उधर भटक रहे हैं। किसानों का कहना है कि समय रहते अगर डीएपी खाद मिल जाती तो खेतों की बोआई समय से हो जाती। जबकि दोनों समितियों के एक ही सचिव पर चार्ज है। जब सचिव श्याम बिहारी से बात करनी चाही तो मोबाइल बंद आ रहा था। किसानों की बात

रबी की फसल का समय चल रहा है। रबी की बोआई के लिए खाद जरूरी है। अगर डीएपी नहीं मिलती है तो बोआई भी नहीं हो सकती है। अगर समय से खाद मिल जाए तो बोआई हो जाएगी।

वीर सिंह, चितौरा किसानों ने अपने-अपने खेतों की जुताई कर दी है। बीज भी तैयार है लेकिन खाद न मिलने से किसान बोआई के लिए परेशान हैं। अगर समय से खाद मिल जाए तो खेतों की बोआई भी समय से हो जाएगी

अंगद सिंह, गोहन

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सचिव द्वारा चेक नहीं लगाई गई थी लेकिन अब लगा दी गई है। एक या दो दिन में गोहन, धमना सहकारी समितियों पर खाद भेज दी जाएगी।

पीएन अनुरागी, जिला सहकारी अधिकारी

कालाबाजारी के कारण आ रही समस्या संवाद सूत्र, रामपुरा : बोआई के लिए क्षेत्र का किसान डीएपी खाद लेने के लिए सुबह से लेकर शाम तक सोसायटी पर चक्कर काटकर खाली हाथ घर वापस लौट रहा है। सोसायटी के कर्मचारी मनमर्जी का काम कर अपने चहेतों को खाद दे रहे हैं।

रबी की फसलों की बोआई के लिए किसान खाद के लिए परेशान हो रहा है। खेतों की बोआई का समय भी आ चुका है। समय बोआई नहीं हुई तो खेत खाली ही छोड़ने पड़ेंगे। क्षेत्र के बुजुर्ग किसान गुलाब सिंह निनावली, लालता निनावली, लालमन बुढ़ेरा, हेमराज निनावली ने बताया कि चार दिनों से रोजाना सुबह छह बजे खाद लेने के लिए सोसायटी पर आ जाते हैं लेकिन सोसायटी के कर्मचारी अपने चहेतों को खाद का वितरण कर अगले दिन खाद देने का आश्वासन देकर चले जाते हैं। किसानों ने कहा कि पहले आधारकार्ड पर खाद दी जा रही थी। अब खतौनी मांगने लगे हैं, जिसके कारण किसानों को दोनों ओर से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि सचिव की मिली भगत से खाद की कालाबाजारी की जा रही है। सचिव राजेंद्र यादव ने बताया कि खाद बांटी जा रही है। किसानों के आधार कार्ड तथा खतौनी के आधार पर खाद दी जा रही है।

Edited By: Jagran