जागरण संवाददाता, उरई : कहने के लिए तो शहर में नगरीय विकास अभिकरण ने अब से दो वर्ष पहले शानदार शेल्टर होम बनवाया था। इसके संचालन की जिम्मेदारी नगरपालिका को सौंपी थी, लेकिन निराश्रितों की रातें फुटपाथ पर ही कटती हैं। तमाम सुविधाएं होने के बावजूद शेल्टर होम में रहने के लिए गरीब नहीं पहुंच रहे हैं, या फिर उनको जानकारी नहीं है, जिससे खुले में रात व्यतीत करना मजबूरी है।

बहुत से बेसहारा लोग किसी तरह भरण पोषण करते हैं और रात फुटपाथ पर गुजारते हैं। गर्मियों में तो किसी तरह से काम चल जाता है, लेकिन सर्द रातें इनके लिए काल से कम नहीं होती हैं। ऐसे लोगों को सर्दी से बचाया जा सके इसके लिए मोहल्ला लहरियापुरवा में दो वर्ष पहले सौ बेड का शेल्टर होम बनवाया गया था। इसमें रजाई, गद्दा, बेड के साथ ही पंखा आदि सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन इसमें निराश्रितों की संख्या शून्य ही दिखाई देती है। हो सकता है एक दो लोग इसमें रह रहे हों। बड़ी संख्या में निराश्रित फुटपाथों पर सोते नजर आते हैं। इधर सर्दी भी अपना प्रभाव दिखाने लगी है। इससे इनको परेशानी होना लाजिमी है। शेल्टर होम की दूरी शहर के बीच से दूर होने के कारण लोग शेल्टर होम नहीं जाते हैं या फिर उनको जानकारी नहीं कि उनके लिए सुविधाओं से सुसज्जित शेल्टर होम बना हुआ है। वास्तविकता भले ही कुछ हो लेकिन इतना तो तय है कि जिम्मेदारों का ध्यान इस ओर नहीं जाता है।

शेल्टर होम को व्यवस्थित करवा दिया गया है। साथ ही जितनी सुविधाएं हो सकती हैं दी जा रही हैं। इसके बाद निराश्रितों की संख्या कम बनी रहती है। जल्दी ही शेल्टर होम की क्षमता भर निराश्रित वहां पर भेजे जाएंगे। इसके लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी ताकि उनको आसानी से शेल्टर होम तक पहुंचाया जा सके।

संजय कुमार, ईओ, नगर पालिका

Posted By: Jagran

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