अनुराग श्रीवास्तव, जालौन

विकास खंड मुख्यालय से दक्षिण की दिशा में 8 किमी दूरी स्थित ग्राम पंचायत गायर में चुनाव पारा चढ़ा हुआ है। लोग सुबह से कलेऊ कर पेड़ की छांव में बैठ कर चुनावी शतरंज के मोहरें बिछाने में लग जाते हैं। प्रत्याशियों का अपने ढंग से आंकलन करने लगते हैं। यह सिलसिला तब तक चलता है जब तक सूर्य सिर पर नहीं आ जाता है।

गुरुवार की सुबह जब हमारी इलेक्शन बाइक गांव में पहुंची तथा गांव की गलियों में भ्रमण किया तो देखा गांव में तारा सिंह के मकान के पास बने शिवालय के पास लगे पेड़ की छाव में चबूतरे पर बैठ कर आपस में चुनावी चर्चा कर रहे थे। राजकुमार कह रहे थे कि गांव के तालाब सूखे पड़े हैं। गांव में बना ट्यूबवेल 5 वर्ष से खराब है। इसे आज तक ठीक नहीं कराया गया है जिससे गांव में पानी की दिक्कत है। गुड्डू चौधरी कहते हैं कि जिसके घोषणा पत्र में गांव के मरघट तक का रास्ता ठीक कराने व टीन सेड कराने की योजना होगी उसी को प्रधान बनाना चाहिए। गुलाब सिंह कहते हैं गांव की भी कई गलियां कच्ची हैं। यह विकास की बाट जोह रही है। गांव के सर्वांगीण विकास करने वाले प्रत्याशी को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।गांव के प्रधान को लेकर ग्रामीणों की अपनी अपनी आहर्ताएं गिना रहे थे। कुछ बातों पर सबका एक मत था कि गांव का प्रधान शिक्षित, योग्य, सही गलत पहचानने वाला तथा गांव की समस्याओं को समझने व उसका निस्तारण करा सके। मतदान में अब सिर्फ 4 दिन शेष रह गये हैं। ऐसे में गांव में चुनाव का बुखार लगातार चढ़ता जा रहा है। लोग कोरोना को छोड़कर सुबह से सांय तक अपने गांव भावी प्रधान को लेकर चर्चा करते रहते हैं। अपने अपने ढंग से अनुमान लगाकर भविष्यवाणी भी कर रहे हैं।गांव की बागडोर युवा के हाथ आती है या किसी बुजुर्ग के हाथ, यह भविष्य के गर्भ में है। जब तक मतदान नही हो जाता तथा मतगणना के परिणाम नहीं आ जाते हैं तब तक कयासों का दौर ही चलता रहेगा। इस चुनावी चर्चा में देव सिंह, अजय सिंह, नीतू सिंह, देव सिंह आदि ग्रामीण शामिल थे। ग्राम पंचायत- गायर

मतदाता - 1400

आबादी - 2500

सीट -आरक्षित

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