संवाद सहयोगी, जालौन : शासन के निर्देशों के बाद भी सरकारी कार्यालयों में तैनात कर्मियों की कार्यशैली में कोई परिवर्तन नहीं नजर आता है। भूमि संरक्षण दफ्तर में अफसरों व कर्मियों की कुर्सियां अक्सर खाली नजर आती है। इससे दूर-दराज से आने वाले लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

काशीनाथ मोहल्ले में भूमि संरक्षण अधिकारी कार्यालय भूमि विकास एवं जल संसाधन प्रथम के कार्यालय में रामगंगा कमांड परियोजना की चार इकाइयों के कार्यालय संचालित है। इसमें 34 कर्मचारियों की नियुक्ति है। गुरुवार की दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर कार्यालय में सिर्फ कोमल सिंह, भंडार लिपिक मनीष श्रीवास्तव, सींचपाल बृजनारायण, रवींद्रनाथ व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शिवकुमार नजर आए। लेखाकार समेत 29 कर्मचारियों रहे 'लापता'

दफ्तर में लेखाकार, लिपिक, अवर अभियंता समेत 29 कर्मचारियों के दर्शन नहीं हुए। अधिकारियों व कर्मचारियों के कार्यालय में न बैठने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। ग्रामीण गढ़ा निवासी विनोद कुमार, मिझौना निवासी मनोज कुमार, हरौली निवासी संतोष कुमार आदि कहते हैं जब भी कार्यालय में समस्या लेकर आओ, सक्षम अधिकारी नहीं मिलते हैं। इससे समस्या का समाधान ही नहीं होता है। शिकायतों को सुनने वाला कोई नहीं है। ढूंढना आसान नहीं राम गंगा कमांड का कार्यालय

रामगंगा कमांड की चार इकाइयों को सरकार द्वारा मर्ज कर दिया गया है तथा सिर्फ एक कार्यालय रह गया है। यह कार्यालय मोहल्ला काशीनाथ में ऐसी जगह संचालित होता है कोई भी व्यक्ति आसानी से किसी के पूछे बिना नहीं पहुंच सकता है। यही कारण है कि विभागीय अधिकारियों के अलावा कोई अधिकारी इसका निरीक्षण करने नहीं जाता है। इसी का फायदा कर्मचारी व अधिकारी उठाते हैं।

डीडी राजेंद्र प्रसाद ने कहा, भूमि संरक्षण अधिकारी के पद रिक्त हैं। इसके कारण अवर अभियंता कार्यालय का संचालन कर रहे हैं। अगर कर्मचारी नहीं आते हैं तो उनकी गोपनीय रिपोर्ट लेकर कार्रवाई की जाएगी।

Posted By: Jagran

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