जागरण संवाददाता, उरई : लोग अपना स्वरोजगार स्थापित कर आगे बढ़ें इसके लिए सरकार भले ही विभिन्न योजनाएं संचालित कर प्रयास कर रही है लेकिन उदासीनता के चलते आवेदकों को लाभ नहीं मिल पाता है। योजनाओं के माध्यम से ऋण आवेदन करने वाले बैंकों के चक्कर काटते रहते हैं लेकिन उनको सफलता नहीं मिल पाती है। खामियां बताकर बैंकों से फाइलें वापस आ जाती हैं।

जिला उद्योग केंद्र के द्वारा मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना, एक जनपद एक उत्पाद सहायता योजना का संचालन कर रही है। इन सभी योजनाओं के माध्यम से ऋण आवेदन करने वाले आवेदक बैंकों के चक्कर काटते हैं लेकिन कोई न कोई कमी बताकर फाइलें वापस कर दी जाती हैं। इनमें तमाम फाइलें वह भी होती हैं जिनमें वास्तव में कमियां होती हैं। वह आवेदक अपने को भाग्यशाली समझे जिसका आसानी से ऋण स्वीकृत हो जाए। उदासीनता के चलते आवेदकों को ऋण स्वीकृत कराने में दांतों तले पसीना आ जाता है। उपायुक्त उद्योग केंद्र पीसी पाठक ने बताया कि मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत इस जनवरी में 92 फाइलें बैंकों में भेजी गई हैं। एक जनपद एक उत्पाद सहायता योजना के तहत 21 फाइलें और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना की नौ फाइलें जनवरी में भेजी गई हैं। इनमें से तमाम आवेदकों की फाइलों में प्रपत्र पूर्ण न होने की वजह से दिक्कत आती हैं। अधिकांश देखने में आता है कि लक्ष्य कम होता है और आवेदन उसके सापेक्ष कहीं अधिक आ जाते हैं। इससे भी दिक्कत होती है। उन्होंने कहा कि उनका काम फाइलों को भेजने का है तो उसमें किसी तरह की कोताही नहीं की जाती है।

Posted By: Jagran

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