संवाद सहयोग, कालपी : सर्दी के बचने के लिए जलाए गए अलाव की चिगारी ने कहर बरपा दिया। रायढ़ दिवारा गांव में कच्चा घर आग की चपेट में आ गया। जब तक काबू पाया जाता, आग ने अगल-बगल के दो और घरों को चपेट में ले लिया। घास-फूस होने की वजह से आग की लपटें आसमान छूने लगीं। बाड़े के चपेट में आने से नौ बकरियों की मौत हो गई, जबकि गाय-भैसें झुलसने से जख्मी हो गईं। सूचना पर पहुंची दमकल टीम ने आग पर काबू पाया। तब तक तीन घरों की गृहस्थी पूरी तरह राख हो गई। पीड़ित खुले आसमान के नीचे आ गए। तहसीलदार के निर्देश पर लेखपाल ने जांच की।

यमुना किनारे गुलौली रोड पर रायढ़ दिवारा गांव है। रात करीब 11 बजे गांव निवासी मुल्लू निषाद का कच्चा घर आग की चपेट में आ गया। तपिश से जगे परिवार के सदस्य शोर मचाते हुए जान बचाने बाहर भागे। धीरे-धीरे आग की लपटें तेज होती गईं और अगल-बगल रहने वाले लाखन और बलवान के घर को अपनी चपेट में ले लिया। आग पर काबू पाने में ग्रामीण नाकाम हो गए। तीनों घरों की गृहस्थी पूरी तरह जलकर राख हो गई। पीड़ितों का कहना है कि करीब दो लाख से ज्यादा का सामान जल गया। सूचना पर दमकल दस्ता पहुंच गया और कड़ी मशक्कत के बाद आग बुझाई जा सकी। बकरियां व भैंसें आईं चपेट में

आग की लपटें और घरों को चपेट में न ले लें, इसकी दहशत से ग्रामीणों के माथे पर पसीना बहता रहा। आग मुल्लू के बाड़े तक पहुंच गई और नौ बकरियां जलकर मर गईं। दो भैंसे भी आग की चपेट में आकर झुलस गईं। मुल्लू ने बताया कि उसका एक पुत्र तथा तीन पौत्रियों की गृहस्थी कैसे चलेगी, यह समझ में नहीं आ रहा है। आग में अनाज, कपड़े और बिस्तर तक जल गए। कच्चा घर होने की वजह से सिर से छत भी उजड़ गई। लाखन की भी दो भैंसें तथा एक गाय आग में झुलस गई व घर का छप्पर भी नष्ट गया। बलवान की गृहस्थी आग की चपेट में आ गई। रातभर गांव में अफरातफरी का माहौल बना रहा। राजस्व विभाग की टीम ने लिया जायजा

तहसीलदार शशिविद द्विवेदी के निर्देश पर लेखपाल प्रमोद द्विवेदी एवं राजस्व टीम ने घटनास्थल का जायजा लिया। पीड़ितों के घरों के नुकसान की रिपोर्ट तैयार की गई। तहसीलदार ने बताया कि पीड़ित परिवारों की उचित मदद की जाएगी। पशु चिकित्सक जीवनराम ने झुलसे पशुओं का इलाज किया।

Posted By: Jagran

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