जागरण संवाददाता, उरई : शासन ने भले ही शहरी क्षेत्र में 22 घंटे व ग्रामीण क्षेत्र में 20 घंटे बिजली आपूर्ति का आदेश दिया है, लेकिन यह प्रभावी साबित नहीं हो पा रहा है। इसकी मुख्य वजह जिले में बिजली विभाग के कमजोर संसाधन का होना है, हालत यह है कि न तो विभाग बिजली चोरी को पूरी तरह से रोक पा रहा है और न ही बकायेदारी वसूल करने में सफल है। दो सौ करोड़ रुपये की बकायेदारी विभागों पर पड़ी है। अकेले औद्योगिक क्षेत्र पर सवा सौ करोड़ का भुगतान बकाया है। जबकि कार्रवाई में विभाग पूरा जोर आम उपभोक्ताओं पर लगा देता है।

जनपद में बिजली आपूर्ति व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए 43 विद्युत उपकेंद्र संचालित हो रहे हैं। पांच केंद्र अभी प्रस्तावित हैं। क्षेत्रफल व आबादी के लिहाज से विद्युत उपकेंद्रों की संख्या तो पूरी है। लेकिन इसके बावजूद बिजली व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। 100 मिलियन यूनिट बिजली की सप्लाई हो रही है।

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थाना स्थापित होने के बाद विद्युत चोरी पर अंकुश नहीं

बिजली चोरी करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई हो सके। इसके लिए वर्ष 2019 में जिले में अलग से थाना स्थापित किया गया। दो साल के भीतर विद्युत अधिनियम के तहत 29 सौ मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। इसके बाद भी लाइन लॉस 36 फीसद पहुंच गया है।

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औद्योगिक क्षेत्र ने तोड़ दी कमर

जिले में दो सौ करोड़ रुपये की बकायेदारी में सबसे ज्यादा औद्यौगिक क्षेत्र पर बकाया है। 45 स्टील फैक्ट्री बंद हो गई हैं। उनका कबाड़ तक बिक गया है। ऐसे में उनसे वसूली को लेकर कोर्ट में वाद चल रहा है। कोर्ट केस के चलते वसूली लटक गई है।

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ढाई लाख से अधिक कनेक्शन :

जिले की आबादी व क्षेत्र के हिसाब से कनेक्शन की संख्या ठीक नहीं है। वर्तमान में ढाई लाख विद्युत कनेक्शन हैं। बड़ी संख्या में लोग अवैध कनेक्शन से बिजली का उपयोग कर रहे हैं।

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बोले जिम्मेदार :

अधीक्षण अभियंता विनोद सिंह का कहना है कि बकायेदारी वसूल करने के लिए ठोस प्रयास किए जा जा रहे हैं। कोर्ट केस को भी निस्तारित करने के लिए मजबूत पैरवी का जाएगी। लाइन लॉस पर नियंत्रण न होना चिता की बात है। क्रास चेकिग अभियान चलाने की रणनीति बनायी गई है। जिससे स्थिति में सुधार हो।

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आंकड़ों पर एक नजर :

कुल कनेक्शन --------2 लाख 56 हजार

व्यवसायिक कनेक्शन- 42 हजार

कुल बकायेदारी ----------- 200 करोड़

औद्योगिक क्षेत्र ---------125 करोड़

Edited By: Jagran