जागरण टीम, हाथरस : जिले में बुखार और डेंगू पीड़ितों का आंकड़ा दिन-ब-दिन बढ़ रहा है। सहपऊ के गांव कोकना कलां के बुखार पीड़ित युवक की सोमवार को मौत हो गई। वहीं कुरसंडा में डेंगू की आशंका वाले छह मरीजों का उपचार आगरा में चल रहा है।

सहपऊ के गांव कोंकना कलां निवासी जगदीश गौतम के 25 वर्षीय पुत्र रवि गौतम को बुखार आने पर आगरा के एसएन मेडिकल कालेज में उपचार चल रहा था। जगदीश गौतम का कहना है कि उनके पुत्र को पांच दिन पूर्व बुखार आया था। दूसरे दिन ही उसे इलाज के लिए आगरा ले गए। आगरा के एसएन मेडकिल कालेज में भर्ती किया था। सोमवार की सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

इसी गांव में कुछ दिन पूर्व तेरह वर्षीय किशोरी की भी बुखार से मौत हो चुकी है। सीएचसी प्रभारी डा. प्रकाश मोहन का कहना है कि युवक की बुखार से मौत होने की सूचना आशा ने दी थी। रिपोर्ट देखने के बाद ही स्पष्ट होगा कि मौत कैसे हुई। गांव में हेल्थ टीम भेजी जाएगी। कुरसंडा में हालात हुए बेकाबू

कुरसंडा में एक माह से डेंगू कहर बरपा रहा है। गांव में भय का माहौल है। ग्रामीण अपने बच्चों को घर से नहीं निकलने दे रहे। उसके बावजूद बच्चे व बड़े बुखार डेंगू के शिकार हो रहे हैं। डेंगू की आशंका वाले मरीजों का इलाज आगरा, हाथरस, सादाबाद, खंदौली में हो रहा है। कुरसंडा के साथ-साथ यह बीमारी कुरसंडा के गांव मोतीगढ़ी तथा नगला मोहन में भी देखी जा रही है।

नगला मोहन के एक दर्जन से अधिक मरीज आगरा में भर्ती हैं। घर-घर में तेज बुखार, सर्दी-जुकाम के मरीजों की चारपाई बिछी पड़ी है। गांव की 55 वर्षीय शीला देवी, 45 वर्षीय विमलेश देवी निवासी नगला मोहन, 6 वर्षीय मानव, 3 वर्षीय कार्तिक,12 वर्षीय रितिका निवासी कुरसंडा, 34 वर्षीय गंभीर सिंह निवासी टीकैत आदि डेंगू से पीड़ित बताए गए हैैं। पूर्व विधायक ने डीएम को भेजा पत्र

कुरसंडा में फैल रही बीमारी को ध्यान में रखते हुए पूर्व विधायक देवेंद्र अग्रवाल ने जिलाधिकारी को पत्र में बताया है कि क्षेत्र के गांव कुरसंडा के साथ ही गांव मढ़ाका में बुखार तथा डेंगू की बीमारी काफी पैर पसार चुकी है।लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में मरीजों को किसी भी प्रकार की मदद नहीं दे पा रही। इन गांव के मरीज अपना उपचार आगरा हाथरस सादाबाद के अलावा खंदौली के चिकित्सालय में कराने को मजबूर हो रहे हैं। बढ़ती हुई बीमारी को ²ष्टिगत रखते हुए दोनों गांव में एक एक चिकित्सीय टीम लगातार लगाई जाए, जो कि निरंतर जांच करते हुए मरीजों को दवा का वितरण करें तथा जो भी बीमारी हो बुखार अथवा डेंगू उसका उपचार गांव में ही किया जाए।

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