जासं, हाथरस : शहर के प्राचीन तालाब के सुंदरीकरण का काम भी तेज गति पर है। फिलहाल तालाब की सफाई की जा रही है। तालाब की दस फुट गहराई तक खोदाई की जा चुकी है। छह करोड़ की लागत से तालाब का सुंदरीकरण होते ही शहर की खूबसूरती में निखार आएगा।

तालाब का अतीत : शहर के बीच आगरा-अलीगढ़ व मथुरा-बरेली मार्ग की क्रॉसिग पर बने तालाब का इतिहास मुगलकाल से जुड़ा है। बताते हैं कि शेरशाह सूरी ने इस तालाब का निर्माण कराया था और उसके पास ही मुसाफिरों के ठहरने के लिए सराय भी बनवाई थी। उद्देश्य यही था कि यहां से गुजरने वाले पथिक तालाब पर प्यास बुझाने के साथ सुखद अनुभूति से अपनी थकान मिटा सकेंगे और जरूरत पड़ने पर सराय में ठहर सकेंगे। तालाब के चारों ओर सीढि़यों के साथ हर कोने पर बनीं तिदरियां इसकी गवाही देती हैं। करीब 500 साल पुराने इस तालाब को और अधिक सजाया-संवारा 200 साल पहले राजा दयाराम ने। उन्होंने अपने किले से तालाब तक सुरंग बनवाई थी। राजा आम रास्ते से न होकर, इसी सुरंग के जरिए रानी के साथ तालाब पर विचरण के लिए आते थे। स्वतंत्रता के बाद जब शहर में रामलीला मंचन शुरू हुआ तो इस तालाब की उपयोगिता अलग अंदाज में होने लगी। रामलीला मैदान से तालाब की दूरी चंद कदम ही है, सो यहां सरयूपार लीला व लंकादहन होने लगा।

गंदे पानी की निकासी :

यह तालाब समय के साथ ही नरक कुंड बना गया। इसमें कूड़ा करकट डाले जाने के साथ ही इसमें शहर की सीवर लाइन व ड्रेनेज को जोड़ दिया गया। इसके कारण इसके हालात बद से बदतर हो गए। तालाब का सुंदरीकरण चुनावी मुद्दा भी बना।

पालिकाध्यक्ष आशीष शर्मा ने इसपर काम शुरू कर दिया है। झांसी की एक कंपनी को इसके सुंदरीकरण का ठेका दिया गया है। गंदे पानी की निकासी के लिए पंपिग स्टेशन बनवाया गया है। गंदे पानी की निकासी होली वाली गली व गंदे नाले में की गई है।

ये है योजना : तालाब के सुंदरीकरण के बाद यहां पर रेस्टोरेंट, पार्किंग, बच्चों के खेलने के लिए पार्क, नौका विहार आदि बनाए जाने की योजना है। करीब छह करोड़ की लागत से यहां विकास कार्य कराए जा रहे हैं। कार्य पूरा होने पर जिले के पर्यटन स्थल के रूप में इसकी पहचान बनेगी। इस पर कोई शुल्क नहीं होगा। शहर का यह सबसे रमणीक स्थल होगा।

दो साल में पूरा होगा कार्य :

तालाब के सुंदरीकरण से संबंधित निर्माण कार्य अधिकतम दो साल के अंदर पूरा करा लिया जाएगा। करीब पचपन साल से यह तालाब अपने स्वरूप को खोते हुए गंदे पानी का स्थान बनकर रह गया था।

इनका कहना है

शहर के हृदय स्थल तालाब को रमणीक बनाया जा रहा है। करीब छह करोड़ की लागत से तालाब को भव्य व आकर्षक रूप प्रदान किया जा रहा है। इसमें नौकाविहार भी होगा। इस पर कोई टैक्स नहीं होगा। गंदे पानी की निकासी की स्थाई व्यवस्था कर इंटरनल नालों को जोड़ा जा रहा है।

-आशीष शर्मा, पालिकाध्यक्ष

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