प्रमोद सिंह, हाथरस : बेसिक स्कूलों में भी अध्यापन का तरीका बदल रहा है। कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर मुरसान ब्लाक के इंग्लिश मीडियम के प्राइमरी माडल स्कूल में पढ़ाई का स्तर काफी अच्छा है। विद्यालय में बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ दीवारों पर अंकित विभिन्न शैक्षिक जानकारियों के जरिए भी पढ़ाया जा रहा है। आसानी से खेल-खेल में बच्चों को समझने में कोई दिक्कत नहीं होती।

बदहाल थी स्कूल की व्यवस्था

कुछ साल पहले तक मुरसान ब्लाक के प्राइमरी स्कूल जोगिया के हालात काफी खराब थे। स्कूलों की खराब दीवारों के साथ ही बच्चों के बैठने की व्यवस्था भी बेहतर नहीं थी। वर्ष 2018 में जब हेड शिक्षिका लक्ष्मी सिंह वहां पहुंचीं तो उन्हें विद्यालय के हालात काफी खराब लगे। उन्होंने तभी ठान लिया था कि विद्यालय हित में कुछ कार्य अन्य शिक्षकों के सहयोग से मिलकर करने हैं, ताकि विद्यालय में बच्चों का ठहराव हो सके।

बदली स्कूल की काया :

कायाकल्प योजना के तहत विद्यालयों को सुंदर व भव्य बनाना था। हेड शिक्षिका व अन्य शिक्षकों ने मिलकर विद्यालयों की कक्षाओं में ऐसी पेंटिग कराई, जिससे आकर्षण बढ़ने के साथ ही बच्चों को उससे कुछ सीख भी मिल सके। विद्यालय की कक्षाओं में वाटर साइकिल, सोलर सिस्टम, ग्रहों की जानकारी, कंप्यूटर, हिदी व अंग्रेजी की वर्णमाला, सप्ताह व महीनों के नाम, गिनती, संगीत के उपकरण, प्रदूषण की जानकारी, पाचन तंत्र, वोट का अधिकार, महापुरुषों के छविचित्र अंकित कराए। बच्चों को याद करने में हुई आसानी

कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर तैयार कराई गई कक्षाओं से बच्चों को फायदा हुआ। बच्चे आसानी से दीवारों पर वर्णमाला व एबीसीडी सहित अन्य शैक्षिक ज्ञान आसानी से अर्जित करने लगे। बच्चों की जिज्ञासा बढ़ी तो शिक्षकों ने उनका समाधान किया। बच्चों को याद करने में आसानी हुई। किताबी ज्ञान के साथ साथ चित्रकारी के जरिए दिए जाने वाले ज्ञान को विभागीय अधिकारियों ने भी काफी सराहा।

अब लगातार बढ़ रहा नामांकन

वर्ष 2018 के बाद जब विद्यालय की दशा को सुधार आया तो विद्यालय में नियमित बच्चों का ठहराव हुआ। वहीं तमाम ग्रामीणों ने अपने बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों से नाम कटवाकर सरकारी स्कूलों में कराया। आज विद्यालय में छात्र नामांकन 165 है। जिन्हें पढ़ाने के एक हेड शिक्षिका के अलावा सात सहायक अध्यापकों की तैनाती है। इनका कहना है

इंग्लिश मीडियम विद्यालय जोगिया से अन्य विद्यालयों को सीख लेनी चाहिए। विद्यालय प्रागंण व कक्षाएं कान्वेंट स्कूल की जैसी लगती है। बच्चों का शैक्षिक ज्ञान का स्तर भी काफी बेहतर है।

शाहीन, बीएसए, हाथरस फोटो-38

दीवारों पर पढ़ाई से संबंधित चित्रकारी को देखकर चीजों को याद करने में काफी आसानी रहती है। देखकर पढ़ने से जल्दी याद हो जाता है।

खुशी भारती, छात्रा फोटो-37

मेरे दोनों बच्चे पहले निजी स्कूल में पढ़ते थे, लेकिन अब गांव का स्कूल भी कान्वेंट स्कूल से कम नहीं है। काफी अच्छी पढ़ाई होती है।

मोहित कुमार, अभिभावक

Edited By: Jagran