संवाद सहयोगी, हाथरस : विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस गुरुवार को जनपद में मनाया गया। अहवरनपुर में कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से विचार गोष्ठी हुई जिसमें वैज्ञानिकों ने मृदा स्वास्थ्य पर विचार व्यक्त किए। केवीके के प्रभारी डा. एसआर सिंह ने कहा कि बीमार हो रही मिट्टी फसल के साथ जनसामान्य के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है।

उन्होंने कहा कि बीमार मिट्टी में उगाई जाने वाले फसलें निम्न गुणवत्ता के साथ रोगाणु वाहक भी होती हैं। मिट्टी के स्वास्थ्य को हरी खाद, गोबर की खाद, कंपोस्ट, वर्मी कंपोस्ट, जीवामृत, घनजीवामृत के प्रयोग से बेहतर बनाया जा सकता है। इसके अलावा ट्राइकोडर्मा, ब्यूबेरिया, वैसियाना के प्रयोग से भी मृदा के कार्बनिक पदार्थ बढ़ा कर उसे स्वस्थ रख सकते हैं।

कृषि अभियंत्रण वैज्ञानिक डॉ. कमलकांत ने कहा कि फसलों के अवशेष के सही प्रयोग से भी मिट्टी को स्वस्थ रख सकते हैं। इसके लिए हैप्पी सीडर, मिट्टी पलट हल का प्रयोग हितकर रहता है। अध्यक्षता पूर्व मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. नत्थीलाल ने की। इस मौके पर रामगोपाल शर्मा सहित क्षेत्र के किसान भी मौजूद रहे। मिट्टी के स्वास्थ्य को ठीक रखता है फसलचक्र

कृषि उपनिदेशक कार्यालय अलीगढ़ रोड पर गोष्ठी में जिला कृषि अधिकारी व उपनिदेशक कृषि डिपिन कुमार ने मिट्टी के बिगड़े स्वास्थ्य पर चिता जताते हुए कहा कि मिट्टी की जांच के लिए जनपद में प्रयोगशाला बनाई गई है। कोई भी किसान नमूना लाकर आसानी से मिट्टी की जांच करा सकता है। डा. जेके शर्मा ने कहा कि मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर रखने के लिए जैविक खादों के साथ फसल चक्र का प्रयोग भी लाभकारी रहता है। इस मौके पर चंद्रपाल शर्मा, डा. हरिओम, श्रीनिवास पचौरी, राजपाल पाठक, मनवीर सिंह, अयोध्या प्रसाद, सुरेंद्र पाल सिंह आदि मौजूद थे।

Posted By: Jagran

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