नीरज सौंखिया, हाथरस :

शहर में एक बड़ी समस्या जलभराव की भी है। इसका कारण है ध्वस्त ड्रेनेज सिस्टम। यही कारण है कि बगैर बरसात के भी शहर के कई गली-मोहल्ले ताल-तलैया बने रहते हैं। अंग्रेजों के जमाने के ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने की लकीर तो पिछले पालिका बोर्ड में भी पिटी और 15 करोड़ रुपये पं¨पग स्टेशनों पर नालों के निर्माण पर खर्च किए गए, मगर बंदरबांट के चलते यह सब प्रयास निरर्थक साबित हुए। कचरा निस्तारण के भी यहां कोई बंदोबस्त नहीं हैं। इसके लिए भी पिछले पांच साल दावे और वादे ही होते रहे, मगर गली-मोहल्लों पर बाजारों से कूड़े के ढेर खत्म नहीं हो सके। इस निकाय चुनाव में भी शहर की बिगड़ी ड्रेनेज व्यवस्था बड़ा मुद्दा बनकर उभर रही है।

शहर में ड्रेनेज सिस्टम ब्रिटिश काल में तैयार हुआ था। वर्ष 1964 में जरूर तत्कालीन चेयरमैन हुकुम चंद्र ओसवाल ने नालों को पक्का कराकर व शहर में सीवर लाइन डलवाकर इसमें कुछ सुधार कराया, मगर उस वक्त शहर की आबादी मात्र 25-30 हजार ही थी। अब आबादी पांच गुना हो चुकी है और पालिका क्षेत्र का क्षेत्रफल पांच वर्ग किमी से बढ़कर आठ वर्ग किमी हो गया है, मगर सीवर व ड्रेनेज सिस्टम वही है। शहर के खारिज पानी की निकासी के लिए वही तीन गंदे कुएं मुरसान गेट, लेबर कालोनी व सीवेज फार्म पर बने हुए हैं। इन पं¨पग स्टेशनों के जरिये शहर का गंदा पानी जलेसर रोड सीवेज फार्म पर पहुंचाया जाता है। वहां बने पं¨पग स्टेशन से अलीगढ़ ड्रेन में इसकी निकासी होती है। शहर की सीवर लाइन पूरी तरह से चोक है। नालों की सफाई न होने के कारण वे भी चोक पड़े हैं और पानी सड़कों पर भरा रहता है। तालाब चौराहे से होली वाली गली तक 38 लाख रुपये की लागत से बना अंडर ग्राउंड नाला भी फेल है। यही कारण है कि बरसात के दौरान कोतवाली, डाकखाने वाली गली आदि में जलभराव हो जाता है।

पिछले पालिका बोर्ड के कार्यकाल में करीब पांच करोड़ की लागत से दो पं¨पग स्टेशन नवल नगर तथा लाला का नगला में बने जरूर, मगर पाइप लाइन पूरी न बिछ पाने के चलते अनुपयोगी साबित हो रहे हैं। एनएच पर बना नाला भी पूरी तरह चोक पड़ा है। पिछले पालिका बोर्ड के कार्यकाल में दस करोड़ रुपये की लागत से जलेसर रोड व मैंडू गेट पर नाला निर्माण शुरू जरूर हो गया, मगर यह पूरा ही नहीं हो सका है।

पब्लिक बोल-

जलभराव से निजात व बेहतर सफाई व्यवस्था की दुहाई हर चुनाव में उम्मीदवार देते हैं, मगर इस समस्या का स्थायी निदान आज तक कोई नहीं करा सका। शहर के ज्यादातर इलाकों में बिन बरसात के जलभराव रहता है।

-डा.राजेश त्रिवेदी, रिटायर्ट चिकित्सक।

जलनिकासी के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए। सफाई कर्मचारियों के नाम पर भी खेल चलता रहा। कोरे दावे और वादे ही होते रहे, धरातल पर कुछ नहीं हुआ। सीवर लाइन पूरी तरह से चोक पड़ी है।

-रंजीत ¨सह, बागला अस्पताल।

अगर जनप्रतिनिधि वादे के अनुरूप थोड़ा सा भी ध्यान दे दें तो ठप पड़ी ड्रेनेज व्यवस्था बेहतर हो जाएगी। नालों की नियमित सफाई कर्मचारी लगाकर कराते हुए सिल्ट भी उठवाई जाए तो शहर नीट एंड क्लीन नजर आए।

-राधा चरन अग्रवाल, व्यापारी।

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सीवर पं¨पग स्टेशन पर करोड़ों रुपये जब खर्च हो चुका है तो उन्हें चालू क्यों नहीं कराया गया? नालों का निर्माण भी पूरा नहीं हुआ है। गली-मोहल्लों में डस्टबिन रखने के नाम पर लाखों रुपये बर्बाद किए गए।

-सचिन गोयल, व्यापारी।

प्रत्याशियों के दावे

शहर के ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर बनाना मेरी प्राथमिकता में होगा। यदि मैं चुनाव जीता तो पहली बोर्ड की बैठक में ही इसका प्रस्ताव पास कराकर प्रदेश व केंद्र से धन की डिमांड करते हुए इस पर कार्य शुरू करा दूंगा।

-आशीष शर्मा, भाजपा प्रत्याशी।

मुझे जानकारी है कि शहर की ड्रेनेज व्यवस्था अंग्रेजों के जमाने की है। तब शहर का दायरा बहुत छोटा था और अब काफी बड़ा हो गया। मैं चुनाव जीती तो शहर में ड्रेनेज व सीवर सिस्टम ही नये सिरे से डलवाया जाएगा।

-ऋतु उपाध्याय, बसपा प्रत्याशी

यदि मैं चुनाव जीती तो शहर के सीवर व ड्रेनेज सिस्टम को प्राथमिकता से सुधारा जाएगा। पं¨पग स्टेशनों को चालू कराते हुए नालों की भी सफाई कराई जाएगी। कूड़ा उठान पर भी पूरा जोर रहेगा, जिससे शहर साफ सुथरा बना रहे।

-लतारानी अग्रवाल, सपा प्रत्याशी।

शहर की स्वच्छता मेरी वरीयता में है। यदि शहरवासियों का मुझे आशीर्वाद मिला तो हर गली-मोहल्ले के नाले नालियों की सफाई कराते हुए पं¨पग स्टेशनों को शुरू करा दूंगा। शहर की सफाई का कार्य दो शिफ्टों में कराया जाएगा, चाहे इसके लिए अलग से ट्रैक्टर व कर्मचारी ही क्यों न लगाने पड़ें।

-अजय भारद्वाज, कांग्रेस प्रत्याशी।

शहर के ठप ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने के साथ ही नियमित घर-घर से कूड़ा एकत्रित कराते हुए नियत स्थान पर उसका निस्तारण मेरी वरीयता में शामिल है। शेष नालों का निर्माण व इनकी सफाई पर भी पूरा जोर रहेगा।

-रवि चौहान, निर्दलीय प्रत्याशी।

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