संसू, हाथरस : ब्रज संस्कृति और लोक विधाओं की देश में अलग ही पहचान है। यहां का कोई भी उत्सव या मेला हो, शुरुआत और समापन का अंदाज अलग ही रहा है। दाऊजी मेले में लंबे समय तक यह परंपरा रही है। शुरुआत रासलीला से और समापन स्वांग मंचन के दौरान नगाड़ों और जयकारों के होता था। अब ऐसा नहीं होता, मगर उन आयोजनों की यादें और लोकप्रियता के किस्से आज भी चर्चा में रहते हैं।

बुजुर्ग बताते हैं कि पहले मेले के अंत में स्वांग का आयोजन किया जाता था, जिसका इंतजार पूरे साल ब्रज क्षेत्र को रहता था। आसपास के लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली से आते थे। साथ में खाना तक लाते थे। यह आयोजन मेले की बड़ी पहचान बन गया था। शुरुआत में मेला पांच दिन का था, जिसमें पंडित नथाराम गौड़ रचित स्वांग की धूम रहती थी। इसके मंचन में पुरुष ही महिला पात्रों के रूप में होते थे। पं.नथाराम ने मलेशिया, रंगून, कनाडा, अमेरिका आदि में भी स्वांग विधा का मंचन कर विदेशों में ब्रज की इस विधा को चमकाने का कार्य किया था। पंडित नथाराम शोध संस्थान के सचिव डॉ. खेमचंद यदुवंशी का मानना है कि समय के साथ आयोजनों में भले बदलाव आए हैं, पर स्वांग पसंद करने वालों की आज भी कमी नहीं है। डॉ. खेमचंद को मिलेगा पुरस्कार

स्वांग को नौटंकी के नाम से जाना जाता है। इसे संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। पंडित नथाराम शोध संस्थान के सचिव डॉ. खेमचंद यदुवंशी इस पुरस्कार के लिए चयनित हुए हैं। उन्हें यह पुरस्कार अक्टूबर में लखनऊ में प्रस्तावित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ देंगे।

Posted By: Jagran

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