जागरण संवाददाता, हाथरस : मधुमक्खी पालक से लूटपाट के मामले में हाथरस जंक्शन पुलिस चौतरफा घिर गई है। गढ़ी धारू के जिन लोगों ने पुलिस पर थर्ड डिग्री देने का आरोप लगाया था, अब लूट पीड़ित ने उन्हीं लोगों को राजनीतिक दबाव में छोड़े जाने का आरोप लगाया है। दोनों ओर से लग रहे आरोपों के चलते सीओ सिकंदराराऊ सोमवार को खुद घटना स्थल पर पहुंचे तथा लूट पीड़ित से बात की।

भरतपुर के रहने वाले देवेंद्र चौधरी मधुमक्खी पालन का काम करते हैं। उनके साथ नेम सिंह इस काम में पार्टनर हैं। नेम सिंह गांव गढ़ी धारू में रहकर मधुमक्खी का पालन करते हैं तथा राजस्थान में सप्लाई करते हैं। फार्म पर उनके साथ स्माइल, वीरेंद्र सिंह व अतुल भी रहते हैं, जो कि उनके लिए काम करते हैं। नेम सिंह के अनुसार 17 दिसंबर की देर रात आधा दर्जन से अधिक लोगों ने उन पर हमला बोला था। मारपीट कर बदमाश 15 हजार रुपये व चारों के मोबाइल फोन लूटकर ले गए थे। नेम सिंह ने बताया कि उस समय फार्म पर लाइट जल रही थी। उन्होंने दो लोगों को पहचान लिया था। सोमवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय व कोतवाली हाथरस जंक्शन पहुंचे देवेंद्र व नेम सिंह ने बताया कि पुलिस ने उन्हीं लोगों को उठाया था, जिनको उन्होंने पहचाना था। आरोप है कि पुलिस ने दो दिन कोतवाली पर रखकर राजनीतिक दबाव में उन्हें छोड़ दिया।

वादी ने जब एसपी से शिकायत की तो हाथरस जंक्शन पुलिस की हवाइयां उड़ गईं। दरअसल एक दिन पहले ही लूट में उठाए गए गढ़ी धारू के जिन लोगों ने थर्ड डिग्री देने का आरोप लगाया था, दूसरे दिन उन्हे सत्ता के दबाव में छोड़ने का आरोप लग गया। दोनों ओर से लगे आरोपों में पुलिस चकरघिन्नी बन गई है। एसपी कार्यालय व थाने पर देवेंद्र व नेम सिंह ने दावे से कहा कि आठ में से दो लोग वही थे, जिनको पहचाना था। पुलिस ने जब पकड़ा था तब वे वही कपड़े पहने थे, जो कि लूट वाले दिन पहने थे। मामला बिगड़ने पर एसपी ने सीओ सिकंदराराऊ राजीव कुमार को मौके पर भेजा। सीओ कोतवाली जंक्शन पहुंचे तथा वहां से घटना स्थल पर गए। यहां वादी व उनके साथियों से बातचीत की। उन्होंने वही बात दोहराई। डीजी जेल का बताया रिश्तेदार

राजस्थान से आए मधुमक्खी पालक देवेंद्र चौधरी ने खुद को डीजी जेल का रिश्तेदार बताया है। यह मामला उनके संज्ञान में भी डाला गया है। इसी वजह से अब मामले की जांच गंभीरता पूर्वक कराई जा रही है। सीओ सिकंदराराऊ हर पहलू की गंभीरता से जांच कर रहे हैं। पुलिस का तर्क है कि सिकंदराराऊ बवाल में उलझे होने के कारण इस प्रकरण का ठीक से सुपरविजन नहीं हो सका था। सियासी दबाव के कारण उलझा मामला

यह बात सही है कि राजनीतिक दबाव के कारण ही पकड़े गए लोगों को छोड़ा गया था। बाद में यही दबाव पुलिस के गले की फांस बन गया। छोड़े गए आठ लोगों ने जब थर्ड डिग्री दिए जाने की शिकायत की तो सिकंदराराऊ विधायक वीेरेंद्र सिंह राणा उनके समर्थन में कूद पड़े और कोतवाली पहुंच गए। इसके कारण एसपी ने प्रथम ²ष्टया चौकी इंचार्ज विपिन यादव को दोषी मानते हुए लाइन हाजिर भी कर दिया, लेकिन अब लूट पीड़ित के दावे ने मामला उलझा दिया। देवेंद्र व नेम सिंह का आरोप है कि दो लोगों को पहचानने के बाद ही दारोगा ने उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। इसके बाद भी सत्ता के दबाव में उन्हें छोड़ा गया। थाने पर आठों लोग रखे गए थे। बिना कोतवाली प्रभारी व अधिकारियों के छोड़ा जाना संभव नहीं लगता। पूरा गांव एक तरफ

इस प्रकरण को लेकर विधायक वीरेंद्र सिंह राणा का कहना है कि वे गांव गए थे। पूरा गांव आठों लोगों के समर्थन में है। दो लोगों को भी गलत पहचाना जा रहा है। दूसरा यदि किसी पर शक भी है तो पुलिस हिरासत में इस तरह मारपीट करना गलत है। कोतवाली के अलावा हम सोमवार को भी पुलिस अधीक्षक से मिले थे, जिसके बाद दारोगा को लाइन हाजिर किया गया। एसपी से जांच के लिए बोला है। निष्पक्ष जांच में हकीकत सामने आ जाएगी।

इनका कहना है

लूट पीड़ित दावा कर रहे हैं कि पकड़े गए आठ लोगों में से दो को उन्होंने पहचाना है। मामला गंभीर है। इसलिए गहनता से जांच की जा रही है। पकड़े गए लोगों से फिर से पूछताछ की जाएगी। उनसे कोई बरामदगी नहीं हुई थी। इसलिए छोड़ा गया था। बरामदगी होने पर उन पर कार्रवाई निश्चित है। अभी तक थर्ड डिग्री की बात पुष्ट नहीं हुई है। न ही उन्हें इतनी चोट है। छानबीन की जा रही है।

-राजीव कुमार, सीओ सिकंदराराऊ

Posted By: Jagran

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