सुरेश सविता, हसायन (हाथरस)

जिन पोखरों में कभी पानी नजर आता था, आज उनके आधे से ज्यादा हिस्सों में भवन नजर आते हैं। कूड़ा व सिल्ट से भी ये अटी पड़ी हैं। बंबा से आने वाले पानी को रोककर यहां पर कब्जा कर खेती की जा रही है। इन पोखरों को जरूरत है सुंदरीकरण और संरक्षण की, लेकिन ये पूरी तरह से अनदेखी की भेंट चढ़ चुकी हैं। दैनिक जागरण के अभियान के छठवें दिन की किस्त में हसायन की पोखरों पर एक नजर।

हसायन में दो पोखरों के साथ ही यहां पर शेखा झील भी है। एक पोखर पर भवन नजर आते हैं, तो दूसरे में कूड़ा करकट डाला जा रहा है। जिस कारण आधे से ज्यादा हिस्सा इनका अटा हुआ है। अनदेखी के कारण ही इन पोखरों का अस्तित्व भी दिन प्रतिदिन गिरता जा रहा है। जल स्तर में भी गिरावट आ रहा है। शेखा झील में भी बंबा से पानी आता था, लेकिन समय के साथ ये भी बंद हो गया है। यहीं वजह है कि यहां पर गंदा पानी है। आज जरूरत है इन पोखरों व झील को अस्तित्व बचाए जाने की, ताकि बरसात का पानी भी बर्बाद न हो सके और इनमें एकत्रित हो। इस झील पर विदेशी पक्षी भी नजर आते हैं, लेकिन बदहाल हो रही झील के कारण वे भी दिनों दिन कम होते जा रहा हैं। यदि इस ओर ध्यान न दिया गया तो आने वाले समय में इनका भी आना पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। इसलिए नगर पंचायत के अधिकारियों को समय रहते झील के साथ ही पोखरों की ओर भी ध्यान देना चाहिए। पोखर व झील के सुंदरीकरण के लिए जल्द प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। जहां से मंजूरी मिल जाने के बाद ही इस पर कार्य कराया जाएगा, ताकि जल स्तर में सुधार हो सके।

वेदमती देवी, अध्यक्ष, नगर पंचायत हसायन तालाब व पोखरों पर अतिक्रमणकारियों की निगाहें हैं, अधिकांश भूमि पर कब्जा किया जा चुका हैं। जो शेष बची हैं उनको शीघ्र ही कब्जा मुक्त कराते हुए कार्रवाई की जानी चाहिए।

किशन चौहान तालाब पोखर में बंबा से पानी आता था, जिसे रोक दिया गया है। कूड़ा आदि भी डाला जा रहा है। आज जरूरत इनकी सफाई के साथ पानी को फिर से छुड़वाए जाने की हैं, ताकि लोग भी आ जा सके।

हरिओम शर्मा चालीस से मात्र बीस बीघा जमीन ही शेष बची हैं। अन्य पोखरों पर कब्जा कर लिया गया हैं। जल स्त्रोतों की बजाय वहां पर इमारतें हैं। खेती भी कराई जा रही है। इसकी ओर ध्यान देने की जरूरत है।

भगवान ¨सह बघेल

By Jagran