जासं, हाथरस : ग्रामीण क्षेत्र में लचर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का निजी डाक्टर जमकर लाभ उठा रहे हैं। तीन हाल में चल रहे अस्पताल में मरीजों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। 10 हजार रुपये में हार्निया से लेकर हड्डी तक के आपरेशन का पैकेज बना रखा है। इसमें आपको दवा भी मिलेगी। केस बिगड़ा तो रेफर। बेचारे मरीज इनके चंगुल में फंसकर जेब कटवाने को विवश होते हैं। जांच भी निर्धारित सेंटरों से ही करवाई जाती है। दैनिक जागरण ने गुरुवार को पड़ताल की तो हकीकत सामने आई।

अलीगढ़ रोड पर रुहेरी गांव में बायीं ओर मैराज हास्पिटल चल रहा है। इसमें बोर्ड पर इमरजेंसी सेवाएं भी लिखा हुआ था। कच्चे नाले पर टूटी पुलिया से जाने का रास्ता भी कच्चा है। इस अस्पताल में बेसमेंट के अलावा ग्राउंड फ्लोर है। इसमें सबसे पहले मेडिकल स्टोर है। बाईं ओर एप्रिन में नर्स बैठी थी। अगली केबिन डाक्टर की थी। उसके बराबर में स्ट्रेचर, कुछ दवाएं और सर्जिकल सामान रखा था। उसी से सटे हाल में 15 बेड पड़े हुए थे। वेंटीलेशन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। आने व जाने का एक ही दरवाजा था। बच्चे, महिलाएं और पुरुष मरीज पड़े हुए थे। मरीजों के तीमारदार आ जा रहे थे। किसी को कोई टोकने वाला नहीं था। आपरेशन थियेटर के बारे में जानकारी की गई तो संतोषजनक जवाब नहीं मिला। यहां पर डाक्टर की केबिन में ललित शर्मा बैठे हुए थे। परिचय के दौरान उन्होंने खुद को डाक्टर बताया। वे एप्रिन में नहीं थे। बातचीत के दौरान कहा कि यहां पर सभी तरह का इलाज किया जाता है। दस हजार रुपये में आपरेशन से लेकर दवा तक की सुविधा है। एक्सरे व अल्ट्रासाउंड़ अलीगढ़ रोड दयानतपुर स्थित निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर से कराए जाते हैं। कौन-कौन से एक्सपर्ट हैं? इस सवाल पर बताया कि डाक्टरों की टीम है। जरूरत के हिसाब से बुलाया जाता है। नाम किसी का नहीं बताया।

इसी रोड पर 500 मीटर दूर चलकर सीधे हाथ पर कृष्णा हास्पिटल है। हास्पिटल के संचालक बीएएमएस डाक्टर पुष्पेंद्र कुशवाह हैं। बेसमेंट में यह हास्पिटल चल रहा है। ऊपरी मंजिल पर मेडिकल स्टोर है। यहां पर दो युवतियां व एक युवक बैठे मिले। वे यूनिफार्म में नहीं थे। अंदर तीन बेड पर मरीज लेटे हुए थे। उसमें एक के पैर पर प्लास्टर चढ़ा हुआ था। उनसे पूछा गया कि यहां पर कौन-कौन सी बीमारियों का इलाज होता है, तो बताया कि साधारण बीमारियों से लेकर हड्डी व अन्य रोगों का भी इलाज किया जाता है। डाक्टर बैठे नहीं थे। विशेषज्ञ के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। बताया गया कि बाहर से डाक्टर आते हैं।

इसी रोड पर इस अस्पताल से आगे साईं हास्पिटल चल रहा है। केबिन में घुसते ही इस हास्पिटल में मेडिकल स्टोर खुला हुआ था। बराबर में बेंच पर एक महिला बच्चे के साथ बैठी हुई थी। डाक्टर के बारे में पूछा गया तो बताया गया कि वे नहीं हैं। बेड भी खाली पड़े थे।

वर्जन-

निजी अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाएं चलाने के लिए विशेषज्ञ होना जरूरी है। साथ में प्रशिक्षित स्टाफ भी जरूरी है। ऐसे अस्पतालों की शिकायत मिलने पर मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में छापेमारी भी की जाती है और उनके खिलाफ कार्रवाई भी जाती है।

-डा.डीके अग्रवाल, एसीएमओ हाथरस