जागरण संवाददाता,हाथरस: भीषण गर्मी से अभी निजात मिलती नहीं दिख रही है। दो दिन मिली राहत के बाद गर्मी का सितम फिर शुरू हो गया है। दोपहर में तो गर्म हवाओं की लपटों के चलते रास्तों पर निकलना भी मुश्किल हो रहा है। चिकित्सालयों में डायरिया व वायरल के रोगियों की संख्या बढ़ गई है। मौसम विशेषज्ञों की मानें तो मानसून के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा।

न्यूनतम तापमान चढ़ने से बढ़ रही उमसभरी गर्मी

मौसम में लगातार परिवर्तन देखा जा रहा है। अब मौसम में उमसभरी गर्मी परेशान कर रही है। इस गर्मी में पंखा व कूलर भी काम नहीं कर रहे हैं। हवा में बैठने के बाद भी पसीना कम नहीं हो रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि अधिकतम तापमान में गिरावट हो रही है। 45 से यह 39 अंक तक पहुंच गया है। न्यूनतम कम नहीं होने से ही उमसभरी गर्मी बढ़ रही है।

चिकित्सालयों में बढ़ रहे मरीज

भीषण गर्मी के चलते उल्टी, दस्त के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। मच्छरों की संख्या बढ़ जाने से मलेरिया भी पैर पसारने लगा है। वायरल के रोगी भी अस्पताल में पहुंच रहे हैं। जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन 14 सौ से 15 सौ तक रोगियों की संख्या पहुंच गई है।

शाम को गुलजार हो रहे बाजार

सुबह बाजार खुलते ही लोगों द्वारा खरीदारी शुरू कर दी जाती थी। भीषण गर्मी से बाजारों में ग्राहक बहुत कम दिखते हैं। दोपहर के समय तो बाजारों में सन्नाटा पसर रहा है। सड़कें भी खाली दिखती हैं। सूर्य के ढलने के साथ बाजारों में ग्राहकों की चहल-पहल बढ़ जाती है। शहर के लोग तो शाम के समय ही बाजारों में निकलते हैं।

खेतों में सूख रहीं फसलें

भीषण गर्मी ने आमजन ही पशु-पक्षी भी परेशान हैं। वह भी नहर, रजबहा, सरोवर व अन्य जल स्रोतों के सहारे अपना ठिकाना बनाए हुए हैं। सबसे अधिक दिक्कतें किसानों को झेलनी पड़ रही हैं। सिचाई करते ही वह दूसरे दिन सूख जाती है। धान की फसल के लिए तैयार की गई नर्सरी भी सूख रही हैं। बारिश के लिए किसान आसमान की ओर ताक रहे हैं।

पांच दिन का संभावित तापमान डिग्री सेल्सियस इस प्रकार रहेगा-

दिन, अधिकतम-न्यूनतम तापमान

मंगल, 36-30

बुध, 33-29

गुरु, 31- 28

शुक्र, 32- 29

शनि, 34- 30

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इनका कहना है-

भीषण गर्मी से सबसे अधिक असर फसलों पर पड़ रहा है। चिलचिलाती धूप में खेतों में कोई काम भी नहीं हो पा रहा है।

- कृष्ण कुमार, किसान

खेतों में खड़ी फसलों की बार-बार सिचाई करनी पड़ रही है। सब्जियों की फसलों में गर्मी के चलते फूल झड़ने से पैदावार घट रही है।

- प्रमोद कुमार किसान

Edited By: Jagran