संवाद सहयोगी, हाथरस

दिल्ली-एनसीआर में छाई जहरीली धुंध ने गुरुवार को हाथरस भी आगोश में ले लिया। धुंध और धूल भरी हवाओं से बुरा हाल रहा। सांसें तक फूली रहीं। आखों में जलन होने लगी। तमाम लोग डॉक्टरों के पास तक पहुंच गए, जिन्हें घरों में रहने की सलाह दी गई।

सुबह से ही धुंध ने सूरज को ढक लिया। दिनभर अंधेरा-सा छाया रहा। दोपहर तक लोगों को सांस लेने में तकलीफ होने लगी। कुछ की आखों में भी जलन महसूस हुई। पहले तो कारण समझ में नहीं आया। डॉक्टर के पास पहुंचे तो वातावरण में प्रदूषण बढ़ने की जानकारी मिली। शाम को धुंध कुछ कम हुई।

बुधवार को राजस्थान और बलूचिस्तान (पाकिस्तान) की ओर से चलीं धूल भरी हवाओं की वजह से उत्तर भारत के आसमान पर धूलभरी परत बन गई है। वैज्ञानिकों ने गुरुवार को आने वाले 48 घंटे मुश्किलों भरे बताए थे। वहीं गुरुवार को पंजाब के चंडीगढ़ में एयर पॉल्युशन का स्तर अब तक के इतिहास में बेहद खराब स्थिति में पहुंच गया तो हालात और बिगड़ गए। हाथरस में जिले में प्रदूषण मापन के कोई प्रबंध न होने से इसका स्तर भी नहीं आंका जा सकता है, लेकिन नगरीय क्षेत्रों में बढ़ते वाहन, हरे पेड़ों के कटान, खेतों में अवशेष जलाने का असर हमारे वातावरण पर साफ नजर आ रहा है। आकाश में धुंध छाते ही लोगों की दिक्कतें बढ़ जाती हैं। जनपद में गुरुवार को सुबह से ही आसमान में धुंध छा गई। इस धुंध ने सूर्यदेव को भी अपने आगोश में ले लिया। सूर्यदेव के दर्शन सुबह से ही न होने तथा तेज हवाएं चलने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। वातावरण में जहरीली गैस बेहद हानिकारक होती हैं। इससे दमा, श्वास आदि के मरीजों की दिक्कतें बढ़ती हैं। वातावरण को दूषित करने से रोकने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने चाहिए।

- पियूष ¨सघल गुरुवार से अचानक आसमान में धुंध छा गई है। यह जहरीली गैस स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है। वातावरण को प्रदूषित करने वाले कारकों की पहचान कर इनकी रोकथाम के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए।

-योगेश कुमार गत वर्ष दीपावली के बाद वातावरण काफी जहरीला हो गया था। अब फिर से आसमान में धुंध छाने से जहरीली गैस बढ़ने का खतरा बढ़ गया है। इसके लिए धुंआ छोड़ते वाहन, प्लास्टिक का जलाना, खेतों के अवशेष जलाना पूरी तरह जिम्मेदार है। एनजीटी के आदेश बेमानी हो गए हैं। सरकार प्रदूषण फैलाने वाले कारणों को रोकने के लिए सख्त कानून बनाकर उसे लागू करे।

-मुकेश गौड़ जिला अस्पताल में अस्थमा, श्वांस के रोजाना 40-50 मरीज आ रहे हैं। इनकी संख्या में कोई इजाफा नहीं हुआ है, लेकिन गर्मी बढ़ने से उल्टी दस्त आदि के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। वातावरण में बढ़ता प्रदूषण श्वसन संबंधी मरीजों के लिए खतरनाक है।

-डॉ. आइबी सिंह, सीएमएस, जिला बागला चिकित्सालय

.. कई मरीजों ने सांस में तकलीफ बढ़ने व खांसी की शिकायत की। सांस रोगियों को घर में रहना चाहिए। बाहर निकलें तो मास्क जरूर लगाएं। धूमपान से परहेज करें।

डॉ. पवन वाष्र्णेय, वरिष्ठ सांस रोग विशेषज्ञ सामान्य से ढाई गुना धुंध

बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी रामगोपाल ने बताया कि गुरुवार को पार्टिकुलेट मैटर (पीएम-10) 250 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पहुंच गया। सामान्य दिनों में यह 100 होता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय में लगे सैंपलर के मुताबिक सात जुलाई को धुंध (पीएम-10) 224 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर था। 13 जून को यह 230 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर पहुंच गया। गुरुवार को और बढ़ गया। विशेषज्ञों के अनुसार अगले 24 घंटे में इसकी मात्रा और बढ़ सकती है। .......

हवा में घुल गए धूल के कण

जासं, अलीगढ़ : एएमयू के भूगोल विभाग के अध्यक्ष प्रो. अतीक अहमद का कहना है कि जब वातावरण में ह्यूमिडिटी आ जाती है तो उसके अंदर मौजूद धूल के अंश में नमी को सोखने की क्षमता बढ़ जाती है। इस कारण धुंध छा जाती है। कई इलाकों में बारिश होने से इस समय तापमान के साथ आ‌र्द्रता बढ़ी हुई है और उसमें धूल के कण बढ़ गए हैं। इन्होंने धुंध की शक्ल ले ली है। धुंध करीब एक से दो किमी की ऊंचाई पर है। बारिश होने पर धुल जाएगी।

Posted By: Jagran