हाथरस: दो शिक्षकों को पछाड़ पल्लवी ने हासिल किया राज्य शिक्षक पुरस्कार, CM करेंगे सम्मानित
हाथरस की शिक्षिका पल्लवी चतुर्वेदी ने राज्य शिक्षक पुरस्कार-2025 जीता है, जिन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 5 सितंबर को सम्मानित करेंगे। ...और पढ़ें

राज्य शिक्षक सम्मान के चयनित हाथरस की शिक्षिका पल्लवी।
जागरण संवाददाता, हाथरस। जिले की शिक्षिका पल्लवी चतुर्वेदी ने राज्य शिक्षक पुरस्कार-2025 की दौड़ में बाजी मार ली है। प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 61 शिक्षक-शिक्षिकाओं की सूची में हाथरस से पल्लवी चतुर्वेदी का नाम शामिल किया गया है।
वह उच्च प्राथमिक विद्यालय (मुख्यमंत्री अभ्युदय) सासनी में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। शिक्षक दिवस पर पांच सितंबर को लखनऊ स्थित लोकभवन सभागार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उन्हें राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित करेंगे।
पुरस्कार के लिए चयनित शिक्षकों को 25 हजार रुपये की नकद धनराशि, प्रशस्ति पत्र और दो वर्ष का सेवा विस्तार दिया जाएगा। इसके अलावा परिवहन निगम की बसों में आजीवन हर वर्ष चार हजार किलोमीटर तक निश्शुल्क यात्रा की सुविधा भी मिलेगी। शासन ने प्रदेश के 61 शिक्षकों के नामों को अंतिम मंजूरी दी है।
जिले से भेजे गए थे तीन नाम, पल्लवी पर लगी मुहर
राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से हाथरस जिले से तीन शिक्षकों के नाम भेजे गए थे। इनमें संविलियन विद्यालय बिजलीघर सासनी के अनिल कुमार, संविलियन विद्यालय बरौस सादाबाद की ललिता कुशवाह और उच्च प्राथमिक विद्यालय सासनी की पल्लवी चतुर्वेदी शामिल थीं।
राज्य स्तर पर प्रस्तावों के परीक्षण के बाद पल्लवी चतुर्वेदी का चयन किया गया। जिला स्तर से भेजे गए प्रस्तावों पर राज्य स्तरीय चयन समिति ने 13, 14, 18 और 19 अगस्त को बैठक कर विचार किया। शिक्षकों के कार्य, उपलब्धियों और विद्यालयों में उनके योगदान के आधार पर चयन प्रक्रिया पूरी की गई।
2009 में हाथरस आईं, 2013 से सासनी में दे रहीं सेवाएं
अलीगढ़ के सेंटर प्वाइंट निवासी पल्लवी चतुर्वेदी की वर्ष 2009 में सहायक शिक्षिका के रूप में हाथरस में नियुक्ति हुई थी। वर्ष 2013 से वह सासनी के उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिक्षण कार्य कर रही हैं।
अपने नवाचार, मेहनत और शिक्षण कौशल के जरिए उन्होंने बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने के साथ विद्यालय के माहौल को बेहतर बनाने में भी योगदान दिया। इसी कार्य को राज्य स्तर पर पहचान मिली और जिले से भेजे गए तीन नामों में उनका चयन हुआ।
