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हाथरस जिले के 247 गांवों को शुद्ध पेयजल की सौगात, शासन को 903 करोड़ की योजना का भेजा गया प्रस्ताव

Published: Fri, 02 Oct 2026 08:16 PM (IST)

हाथरस जिले के 247 गांवों में खारे पानी की समस्या दूर करने के लिए 903.05 करोड़ रुपये की पेयजल योजना प्रस्तावित की गई है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. हाथरस में 903 करोड़ की पेयजल योजना प्रस्तावित।

  2. 247 गांवों को खारे पानी की समस्या से मिलेगी मुक्ति।

  3. लोअर गंगा नहर से पानी शोधित कर गांवों तक पहुंचेगा।

जागरण संवाददाता, हाथरस। जिले के 247 गांवों में खारे पानी की समस्या दूर करने के लिए 903.05 करोड़ रुपये की पेयजल योजना प्रस्तावित की गई है। इसके तहत लोअर गंगा नहर से पानी लेकर शोधित करने के बाद गांवों तक पहुंचाया जाएगा।

योजना के लिए एटा के ग्राम भदेरा में 94 एमएलडी क्षमता का जल शोधन संयंत्र स्थापित करने और 860.05 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव है। योजना पूरी होने पर सादाबाद और सहपऊ के सभी गांवों सहित हाथरस, हसायन और मुरसान विकास खंडों के लवणता प्रभावित गांवों को राहत मिलने की उम्मीद है।

सांसद ने बताया- प्रस्ताव तैयार

सांसद अनूप प्रधान ने बताया कि जनपद के सात विकास खंडों के 644 राजस्व ग्रामों में से 247 गांवों में भूजल की गुणवत्ता प्रभावित है। पानी में टीडीएस की अधिकता और लवणता के कारण इन गांवों में भूजल आधारित पेयजल आपूर्ति चुनौती बनी हुई है। समस्या के स्थायी समाधान के लिए गंगा नहर को जल स्रोत बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित परियोजना के तहत एटा जिले की जबरा चौकी के पास लोअर गंगा नहर से पानी लिया जाएगा। इसे ग्राम भदेरा में प्रस्तावित जल शोधन संयंत्र में शोधित किया जाएगा। इसके बाद पाइपलाइन के माध्यम से हाथरस और एटा के संबंधित क्षेत्रों में जलापूर्ति की जाएगी। योजना में 167 मौजूदा उच्च जलाशयों को पाइपलाइन नेटवर्क से जोड़ने का प्रस्ताव है। जिले के लिए प्रतिदिन 53 एमएलडी पानी की मांग निर्धारित की गई है।

सांसद की पहल पर आगे बढ़ी योजना

खारे पानी की समस्या का मुद्दा सांसद अनूप प्रधान ने केंद्र सरकार के समक्ष उठाया था। 15 जून 2026 को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता में जल जीवन मिशन की समीक्षा बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई।

इसके बाद नमामि गंगे विभाग के अपर मुख्य सचिव और आगरा क्षेत्र के मुख्य अभियंता के निर्देश पर परियोजना की प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट छह अगस्त 2026 को लखनऊ में प्रस्तुत की गई।

संशोधित पीएफआर अब जिलाधिकारी के माध्यम से राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन, लखनऊ को भेजी गई है, जहां इसके आधार पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जानी है। नहर से पानी लेने के लिए सिंचाई विभाग की एनओसी की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके बाद डीपीआर और स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

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