हाथरस में गर्भवती महिलाओं के लिए बड़ी राहत, 32 निजी केंद्रों पर मुफ्त अल्ट्रासाउंड सुविधा
हाथरस में गर्भवती महिलाओं को अब 32 सूचीबद्ध निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर मुफ्त जांच की सुविधा मिलेगी, जिससे सरकारी अस्पतालों ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
गर्भवती महिलाओं को ई-वाउचर से मिलेगी जांच की सुविधा।
ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को घर के पास जांच का लाभ।
संवाद सहयोगी, हाथरस। जिले की गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए अब सरकारी अस्पतालों में लंबी प्रतीक्षा या निजी केंद्रों पर जेब ढीली करने की जरूरत नहीं होगी। स्वास्थ्य विभाग ने निशुल्क जांच की सुविधा के लिए जिले के 32 निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र सूचीबद्ध किए हैं। पहले केवल 15 केंद्रों के माध्यम से यह सुविधा उपलब्ध थी।
केंद्रों की संख्या बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को भी अपने क्षेत्र के नजदीक जांच कराने की सुविधा मिलेगी। नई व्यवस्था में गर्भवती महिला को सबसे पहले नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पर पंजीकरण कराना होगा। इसके लिए आशा कार्यकर्ता की मदद ली जाएगी।
चिकित्सकीय जांच के बाद अल्ट्रासाउंड की जरूरत होने पर महिला का विवरण दर्ज किया जाएगा और उसके मोबाइल नंबर पर ई-वाउचर भेजा जाएगा। महिला चिन्हित निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र पर ई-वाउचर दिखाकर निशुल्क जांच करा सकेगी।जिले के सभी ब्लाकों में यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
इससे खासकर उन महिलाओं को राहत मिलेगी, जिन्हें सरकारी अस्पतालों में अधिक संख्या के चलते अल्ट्रासाउंड के लिए अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। निजी केंद्रों का दायरा बढ़ने से जांच के विकल्प भी बढ़ेंगे।
महीने में चार दिन पंजीकरण और ई-वाउचर की प्रक्रिया
सीएचसी और पीएचसी पर प्रत्येक माह की पहली, नौ, 16 और 24 तारीख को गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए कैंप लगाए जाते हैं। कैंप में चिकित्सक महिला की जांच कर अल्ट्रासाउंड की आवश्यकता तय करते हैं। जरूरत होने पर पंजीकरण के बाद ई-वाउचर जारी किया जाता है। इसके आधार पर महिला सूचीबद्ध केंद्र पर जांच करा सकती है।
जिले में अब 32 निजी केंद्रों को इस योजना से जोड़ा गया है। आशा कार्यकर्ता के माध्यम से गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण कराया जाएगा। मोबाइल पर प्राप्त ई-वाउचर के आधार पर चिन्हित केंद्र पर निशुल्क अल्ट्रासाउंड कराया जा सकेगा। इससे महिलाओं को सुविधा मिलने के साथ सरकारी अस्पतालों में जांच का दबाव भी कम होगा।
