संवाद सहयोगी, हाथरस : एक बार फिर से फर्जी व टेंपर्ड शिक्षकों पर शिकंजा कसा जा रहा है। इस बार शासन स्तर से इनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश बेसिक शिक्षा अधिकारी को दिए गए हैं। इसकी भनक लगते ही फर्जी शिक्षकों में खलबली मच गई है। एक बार फिर वे बचाव का रास्ता निकालने में जुट गए हैं। इससे पहले बर्खास्तगी पर हाईकोर्ट से स्टे ले आए थे।

यह था मामला

डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय से वर्ष 2004-05 में बीएड व स्नातक आदि करने के बाद शिक्षक बनने वाले अभ्यर्थियों के रिकार्ड में गड़बड़ी की शिकायत पर एसआइटी ने जांच की तो बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया था। फर्जी व टेंपर्ड शिक्षकों की सूची एडी बेसिक कार्यालय को पिछले साल जनवरी-फरवरी में ही उपलब्ध कराई गई थी। बीएसए ने जांच समिति गठित कर एसआइटी की सूची में शामिल शिक्षकों के डाटा का मिलान कराया और पिछले साल जुलाई में जिले के 71 फर्जी व टेंपर्ड शिक्षकों की सेवा समाप्त कर दी।

हाईकोर्ट का लिया सहारा :

फर्जी व टेंपर्ड शिक्षक नौकरी बचाने के लिए हाईकोर्ट पहुंच गए। कोर्ट से बीएसए की कार्रवाई पर स्टे पाने के बाद पुन: डूयटी ज्वाइन कर ली। वेतन भी पाने लगे।

अब वीसी में नया फरमान :

पिछले दिनों उच्च अधिकारियों की बीएसए से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के दौरान इन फर्जी शिक्षकों का मुद्दा उठा। सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने इस मामले में दिशा-निर्देश मांगा, जिसपर विभाग के उच्च अधिकारियों ने साफ कहा कि फर्जीवाड़ा पर विभाग से जो भी कार्रवाई हो चुकी है, उसी आधार पर फर्जी शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाए। रही बात हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन होने की तो उसमें भी विभाग सक्रिय पैरवी करेगा और दागियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। फर्जी शिक्षकों पर एफआइआर के निदेश की भनक लगते ही फर्जी शिक्षक एक बार फिर बचाव की मुद्रा में आ गए हैं।

बीआरएस की फिराक में दागी

प्रदेश सरकार ने भ्रष्टों के सफाई का अभियान तेज कर दिया है। विभिन्न विभागों में लगातार कार्रवाई चल रही है। अब शिक्षा विभाग में भी दागियों से दूरी की मुहिम तेज हुई है। चपेट में आ रहे फर्जी शिक्षक अब वीआरएस लेकर अपना फंड बचाने की जुगत में जुट गए हैं। इनका कहना है-

फर्जी शिक्षकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए वीडियो कांफ्रेंस में निर्देश दिए गए थे। जल्द ही फर्जी शिक्षकों के खिलाफ संबंधित कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी।

-हरीशचंद्र, बीएसए, हाथरस हाथरस परिस्थितियों के अनुसार मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है। बहाली एक अलग प्रक्रिया है तथा विभाग द्वारा पाया गया फर्जीवाड़ा अलग। एफआइआर में केवल आरोप लगते हैं, दोष सिद्ध नहीं होता।

-कपिल मोहन गौड़, अधिवक्ता।

Posted By: Jagran

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