जागरण संवाददाता, हाथरस : कोरोना के दौर में किसानों को हाईटेक किया जा रहा है। पारंपरिक खेती करने वाले जिले के किसान अब डिजिटलीकरण की राह पर चल पड़े हैं। किसानों के बीच कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग ने यूरिया बिक्री केंद्रों पर डिजिटल भुगतान की व्यवस्था की है। जिले के 90 प्रतिशत से अधिक यूरिया बिक्री केंद्रों पर डिजिटल लेनदेन की व्यवस्था शुरू हो गई है।

खाद बिक्री केंद्रों पर डिजिटल भुगतान के लिए पायलट प्रोजेक्ट के लिए कोरोना काल के दौरान व्यवस्था बनाई गई है। इसके तहत उर्वरक के डीलर और रिटेलर के बैंक खाते को नए क्यूआर कोड से कनेक्ट कराया गया। डिजिटल भुगतान किसानों के बीच प्रख्यात होने के बाद विभाग ने इसका दायरा बढ़ाया है। जिले के 90 प्रतिशत से अधिक यूरिया बिक्री केंद्रों पर डिजिटल भुगतान के लिए क्यूआर कोड को काउंटर पर लगाया। नई व्यवस्था में भीम एप के जरिये भुगतान की सुविधा दी गई है। डिजिटल लेनदेन शुरू होने से किसान उर्वरक खरीदने के लिये नकद लेकर चलने के खतरे से बच सकेंगे और लेनदेन में पारदर्शिता आएगी।

डिजिटल लेनदेन पर जोर

छोटे एवं मझोले शहरों मे तेजी से भुगतान के लिए डिजिटल माध्यमों को अपनाने से देश में 'ऑनलाइन' लेनदेन 2020 में 80 प्रतिशत बढ़ गया। मोबाइल के माध्यम से तुंरत भुगतान की सुविधा यूपीआइ (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) की बात की जाए तो इसके जरिये बहुत तेजी से लेनदेन हुआ है। इस तरह कार्ड, नेटबैंकिग और मोबाइल बटुए पीछे छूट गए हैं। वर्जन --

उर्वरक बिक्री में पारदर्शिता लाने के लिए बीते दिनों डिजिटल भुगतान की व्यवस्था शुरू की गई थी। अब जिले के ज्यादातर यूरिया बिक्री केंद्रों पर यह सुविधा उपलब्ध हो गई है। नई व्यवस्था से विक्रेता किसानों से ज्यादा दाम नहीं वसूल पाएंगे।

डिपिन कुमार, जिला कृषि अधिकारी