संवाद सहयोगी, हाथरस : देवोत्थान एकादशी पर्व के साथ से शहनाइयां भी गूंजेगी। शुक्रवार को घर-घर पूजा अर्चना करके देव उठाए जाएंगे। विवाह-शादियों को लेकर बैंडबाजे वालों के साथ बाजार में कपड़ों की दुकान व ब्यूटीपार्लरों पर महिलाओं का आना शुरू हो गया है।

देवोत्थान एकादशी का पर्व शुक्रवार को मनाया जाएगा। इसके लिए लोगों ने गुरुवार से ही तैयारियां शुरू कर दी। इस पर्व पर फल व सब्जियों की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। इसी के तहत शहर में गन्ना, बैंगन, शकरकंद, सिघाड़े, मूली आदि की खूब बिक्री हुई। देवोत्थान एकादशी का विशेष महत्व शादियों को लेकर है। हिदू धर्म में इस दिन से शादी-विवाह शुरू हो जाते हैं। बताते हैं कि इस दिन सोये हुए देवों के जागने के साथ ही विवाह-शादियों के लिए शुभ मुहूर्त भी शुरू हो जाता है। इस दिन सबसे अधिक ऐसे विवाह होते हैं जो पत्रा आदि में नहीं बन पाते।

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बैंडबाजे वालों ने भी खूब किया रिहर्सल

गुरुवार को बैंडबाजे वालों की दुकानों को पर बैंडबाजे इस तरह बजते नजर आये कि जैसे वहां कोई बारात चढ़ रही हो। वे शादियों में होने वाली चढ़त के समय बजने वाली धुनों का रिहर्सल कर रहे थे। शहर में सबसे अधिक बैंडबाजे वालों की दुकान चामढ़गेट पर स्थित हैं। मास्टर उमर ने बताया कि बारात चढ़ाने से पूर्व नई-नई धुनों की रिहर्सल करते हैं। शादियां शुरू होने के बाद तो इसके लिए समय ही नही मिलता।

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दुल्हन के लिए वेल्वेट के लहंगे की डिमांड

शादियों को लेकर बाजार में कपड़ों की नई-नई वैराइटी दुकानों में भरी पड़ी हैं। इनमें दुल्हन के लिए वेल्वेट लहंगा व दूल्हे के लिए इंडोवेस्टर्न शेरवानी का कल्चर बहुत चल रहा है। इसमें कुछ नई ब्रांड कुछ इस प्रकार हैं-

ब्रांड बैराइटी कीमत

लहंगा वेल्वेट, अनुष्का, दीपिका व जोधा 5000 से 25000

साड़ी दिलवाली, प्योर सिल्क, साउथ सिल्क,

फेंटिक लॉ 500 से 20000

लांचा ग्लेडर, केंट लहंगा 2000 से 10000

शेरवानी इंडोवेस्टर्न, चिकन वर्क, 3000 से 20000

महाराजा कट

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सजने के लिए ब्यूटी पार्लर महत्वपूर्ण

शादी समारोह में आकर्षक दिखने की चाह सभी में होती है। कपड़ों के साथ इसमें चेहरा भी विशेष महत्व रखता है। इसे लेकर महिलाएं विशेष सतर्कता बरतती हैं। ब्यूटी को निखारने के लिए बेहतर क्वालिटी के प्रोडक्ट भी प्रतिष्ठान में सजा दिये गए हैं।

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नवंबर व दिसंबर में 14 दिन है शुभ मुहूर्त

इस बार विवाह का मुहूर्त नवंबर व दिसंबर में सिर्फ 14 दिन का ही है। इसमें नवंबर में 18, 19, 21, 22, 28, 29 व 30 की तिथियां हैं। वहीं दिसंबर में 1, 5, 6, 7, 10, 11 व 12 की तिथि शुभ बताई गईं हैं। इसमें देवोत्थान एकादशी के दिन अनसूझो विवाह होते हैं।

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वर्ष में तीन बार होते अनसूझे विवाह

विद्वानों की मानें कुछ विवाह पत्रा में शुभ नहीं निकलते या यूं कहें कि विवाह बनते ही नहीं हैं। ऐसे विवाह वर्ष में केवल तीन मुहूर्त निकलने की परंपरा रही हैं, इनमें वसंत पंचमी, देवोत्थान एकादशी व फुलैरार दौज शामिल है। इस दिन बिना मुहूर्त के शादियां संपन्न होती हैं।

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जाम के झाम से जूझेंगे लोग

देवोत्थान के साथ शुक्रवार से सहालगों की शुरुआत भी हो जाएगी। इसके साथ-साथ रात्रि में बारात भी निकलेंगी। इससे लोग जाम के झाम से जूझेंगे। - हिदू रीति रिवाज के अनुसार विवाह शुभ मुहूर्त में हुआ करते हैं। इस बार 14 दिन का ही शुभ मुहूर्त निकला है। इसमें विवाह की शुरुआत देवोत्थान एकादशी के साथ हो जाएगी।

- पं. उपेंद्र नाथ चतुर्वेदी

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देवउठनी या देवोत्थान एकादशी को ही भगवान विष्णु क्षीरसागर में चार मास शयन के बाद जागते हैं। दीपावली के बाद देवोत्थान एकादशी को भगवान विष्णु के जागने के साथ ही मागलिक और शुभ कायरें की शुरुआत हो जाती है। तुलसी विवाह के बाद मागलिक कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे।

- पं सुभाष चंद्र दीक्षित

Posted By: Jagran

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