जासं, हाथरस: बूलगढ़ी मामले में जांच कर रही सीबीआइ एक-एक बिंदु पर मुतमुईन होना चाहती है। चारों आरोपितों में से एक के नाबालिग होने का एक सबूत मिलने के बाद सीबीआइ अन्य प्रमाण भी जुटाने के लिए गुरुवार को फिर गांव पहुंची।

बूलगढ़ी मामले में चारों आरोपितों के घरों पर जाकर सीबीआइ तमाम जानकारिया जुटा चुकी है। एक आरोपित के यहां हाईस्कूल की अंकतालिका मिली। जिसमें दर्ज जन्मतिथि के आधार पर उसकी उम्र 18 वर्ष से कुछ माह कम आकी गई। आरोपित ने हाईस्कूल की पढ़ाई जवाहर स्मारक इंटर कालेज, मीतई में की है। हालांकि परीक्षा में वह फेल हो गया था। सीबीआइ की टीम कालेज जाकर भी इसकी तस्दीक कर चुकी है।

गुरुवार को सीबीआइ की टीम सुबह 11 बजे गांव पहुंची। टीम नाबालिग आरोपित के पड़ोस में रहने वाले घरों के अलावा उसके साथ पढ़ने वाले लड़कों के यहां भी गई। टीम के दो सदस्य गांव के ही प्राइमरी स्कूल भी गए थे। स्कूल में शिक्षण कार्य बंद चल रहा है। सिर्फ शिक्षक ही आ रहे हैं। बुधवार को स्कूल के हेडमास्टर से रिकार्ड देखने के साथ जानकारी भी ली थी। टीम ने गांव का परिवार रजिस्टर मंगाकर भी पड़ताल की। परिवार रजिस्टर में परिवार के हर सदस्य की जानकारी के साथ उसकी उम्र भी दर्ज होती है।

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छोटू के घर पर भी गई टीम

टीम ने गुरुवार को घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने वाले छोटू के घर जाकर भी छानबीन की। वहां छोटू के अलावा उनके परिवार वालों से से पूछताछ की। छोटू से पहले भी कई बार पूछताछ की जा चुकी है।

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एनजीओ में पढ़ाने वाली शिक्षिका से होगी पूछताछ

सीबीआइ की टीम अपनी जांच का दायरा लगातार बढ़ा रही है। आरोपित और मृतका के स्वजन के पड़ोसियों के अलावा अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। गांव की ही एक महिला एनजीओ के माध्यम से बच्चों को पढ़ाती है, उनके पास आज एक फोन आया था। यह बात उसके स्वजन ने बताई है। महिला को सीबीआइ ने अस्थाई कार्यालय पर पूछताछ के लिए बुलाया है। सीएफआइ के सदस्यों की जमानत पर सुनवाई चार को

जासं, मथुरा : कैंपस फ्रंट आफ इंडिया (सीएफआइ) के सदस्य मसूद और आलम की जमानत गुरुवार को नहीं हो सकी। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) न्यायालय (दशम) अमर सिंह की अदालत में प्रार्थना पत्र पर सुनवाई की गई। एसटीएफ ने अदालत से आरोपितों के खिलाफ साक्ष्य संकलन को समय मांगा। इस पर अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख चार नवंबर तय की है।

हाथरस जाते समय पांच अक्टूबर को यमुना एक्सप्रेस वे से सीएफआइ के चार सदस्य अतीकुर्रहमान, मसूद, आलम और सिद्दीकी को गिरफ्तार किया गया था। इनके पास से हाथरस कांड में हिसा भड़काने संबंधी दस्तावेज मिले थे। मांट थाने में देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर इन्हें जेल भेज दिया गया था। मसूद और आलम के जमानत प्रार्थना पत्र पर एडीजे की अदालत में सुनवाई हुई। जिला शासकीय अधिवक्ता शिवराम सिंह और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नरेंद्र शर्मा ने बताया, एसटीएफ के डिप्टी एसपी राकेश पालीवाल ने साक्ष्य संकलन के लिए अदालत को प्रार्थना पत्र दिया था। इस पर भी अदालत ने विचार किया। सुनवाई के बाद आलम और मसूद के जमानत प्रार्थना पत्र पर अगली सुनवाई के लिए चार नवंबर की तारीख तय की है।

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बेगुनाह हैं मेरे पति : बुसरा

पुलिस ने जिन चार लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें रामपुर निवासी मोहम्मद आलम कार चला रहा था। उसकी पत्नी बुसरा आज अपनी ननद फुलवी, शैबी, सास चहाना, मौसेरी सास फरजाना और आलम के रिश्ते के भाई महबूब अली के साथ मथुरा आई थीं। बुसरा का मीडिया से कहना था, वह दिल्ली के सुंदर नगर में किराये के मकान में रहती है। पति 12-13 साल से ओला गाड़ी चला रहे थे। उनको फंसाया जा रहा है। पति पढ़े-लिखे नहीं है। उनका तो बैंक खाता तक बंद पड़ा है। उनसे जेल में मिलने भी नहीं दिया जा रहा है। उनके साथ जिन तीन लोगों को पकड़ा गया है, उनको वह नहीं जानते हैं।

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