संवाद सहयोगी, हाथरस : मेला श्री दाऊजी महाराज स्थित वेद भगवान सनातन धर्म सभा शिविर में गुरुवार को आयुर्वेद सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें आयुर्वेद को जीवन के लिए प्रकृति का अमूल्य वरदान बताया गया। इस विधा के चिकित्सकों ने असाध्य रोगों से बचने के लिए आयुर्वेदिक उपाय भी लोगों को बताए।

सांकेतिक मेला श्री दाऊजी महाराज में बुधवार को आयुर्वेद सम्मेलन का आयोजन गणेश पूजन, वेद वंदना व धन्वंतरि की स्तुति के साथ किया गया। कार्यक्रम का संयोजन करते हुए वैद्य मोहन राकेश ने बताया कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति है। इसमें सभी रोगों का उपचार निहित है। चिकित्सकों के परामर्श से ली गईं आयुर्वेदिक दवाएं शरीर पर कभी भी नकारात्मक प्रभाव नहीं डालती हैं। यह सुलभ व सरल चिकित्सा पद्धति है। अध्यक्षता डा. जितेंद्र स्वरूप शर्मा फौजी ने की। इसमें दिवाकर शर्मा, स्वदेश अग्रवाल, पुनीत अग्निहोत्री, शिवनंदन अग्निहोत्री, डीके जैन, सीएस राघव मौजूद रहे। विदेशों में लोकप्रिय है आयुर्वेद

विशेषज्ञों ने कहा कि एलोपैथिक दवाएं तुरंत असर तो करती हैं मगर लंबे समय तक इनका प्रयोग करने से शरीर पर बुरा असर पड़ता है। कभी-कभी तो इससे रोग खत्म होने के बजाय बढ़ भी जाता है। आयुर्वेदिक दवाएं पूरी तरह से प्राकृतिक हैं। यह रोगों को जड़ से खत्म कर देती हैं। अमेरिका, रूस, नेपाल, चीन सहित अन्य देशों में भी आयुर्वेद को अपनाया जा रहा है। असाध्य रोगों को भी जड़ से

खत्म कर देता है आयुर्वेद

चिकित्सकों ने बताया कि आयुर्वेदिक दवाओं के प्रयोग से खून की कमी, डायबिटीज आदि असाध्य रोग भी खत्म हो जाते हैं। मधुमेह को खत्म करने के लिए सभी अंग्रेजी दवाएं बंद कर चंद्रप्रभा वटी की दो-दो गोली तीन बार लेनी चाहिए। चाय, दूध, दही, मांस, मीठा व चाय सहित सभी नशा इसमें प्रतिबंधित हैं।

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