जासं,हाथरस: कोरोना काल में आम दिन चर्चा के साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की भी सूरत बदल दी है। सरकारी हो या फिर निजी अस्पताल। मुंह पर मास्क, चेहरे पर मास्क सीट, हाथों में ग्लब्स और सैनिटाइजर का इस्तेमाल आम हो गया। वहीं चिकित्सक व मरीजों में महामारी के प्रति जागरूकता बढ़ी है। शारीरिक दूरी बढ़ने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं में भी इजाफा हुआ है। हालांकि, टीबी अस्पताल को बंद कर एल-2 अस्पताल बना दिया गया है। वहीं निजी अस्पतालों में भी कोविड टीकाकरण चल रहा है।

जनपद में कोविड-19 का पहला केस 31 मार्च 2020 को मिला था। इसके बाद मरीज बढ़ते गए। ऐसे में अस्पतालों में भी चिकित्सा सेवा बेहतर हुई। जिले में 10 वेंटिलेटर के साथ पांच आइसीयू बैड स्थापित किए गए। वहीं कोल्डचेन को भी दुरुस्त किया गया। कोविड टेस्ट शुरू होने के साथ ही कोविड डेस्क की भी स्थापना हुई। इस बदली व्यवस्था के तहत टीबी अस्पताल को एल-2 अस्पताल में परिवर्तित कर दिया गया। जिला अस्पताल के ही एक कमरे में मरीजों को दवा वितरण की जाती है। बात निजी अस्पतालों की करें तो इनकी भी सूरत में काफी बदलाव हुआ है।

क्वारंटाइन सेंटर भी बनाए गए

कोरोना संक्रमण की शुरुआत में जिले में आधा दर्जन क्वारंटाइन सेंटर बनाए गए। आरपीएम कॉलेज, प्रकाश एकेडमी, सीमेक्स स्कूल सासनी, टीवी हास्पिटल आदि थे। इसके अलावा मुरसान सीएचसी व एबीजी हास्पिटल को एलवन हास्पिटल बनाया गया।

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वैक्सीनेशन का कार्य जारी

कोविड संक्रमण के बीच वैक्सीनेशन भी युद्ध स्तर पर चल रहा है। टीवी हास्पिटल के अलावा सभी सीएचसी पर टीकाकरण किया जा रहा है। इसके अलावा एबीजी हास्पिटल और सरस्वती हास्पिटल में प्राइवेट वैक्सीनेशन सेंटर बनाया गया है।

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सुरक्षा से देख रहे मरीज

कोरोना का खतरा अभी कम नहीं हुआ है। ऐसे में डाक्टर पूरी सावधानी के साथ मरीजों को देख रहे हैं। ओपीडी में शीशे लगाकर मरीजों को देखने की व्यवस्था की है। मास्क के साथ-साथ कोविड शील्ड समेत अन्य बचाव के इंतजाम किए गए हैं।

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