कमल वाष्र्णेय, हाथरस

ये व्यथा है, उस परिवार कि जिसने बाल यौन शोषण के दर्द को करीब से झेला। बच्चे ने तो मानसिक प्रताड़ना झेली ही, साथ ही परिवार को भी भारी तनाव से गुजरना पड़ा। बच्चे को इस सदमे से उभारने में काफी वक्त लगा। आरोपित को सजा दिलाने के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। करीबियों से काफी मदद मिली। लोगों ने हिम्मत बंधाई और हर कदम पर साथ दिया। इससे न सिर्फ परिवार इस सदमे से उभर पाया, बल्कि को यह घिनौना कृत्य करने वाले को उसके अंजाम तक भी पहुंचाया।

घटना मथुरा-बरेली मार्ग स्थित एक स्कूल की है। इस स्कूल में ही रहने वाले पुजारी के बच्चे के साथ घटना घटित हुई। वर्ष 2016 में बच्चा नौ वर्ष का था तथा कक्षा छह का छात्र था। पिता पुजारी होने के कारण वह स्कूल कैंपस में ही रहता था। 26 सितंबर 2016 की देर शाम स्कूल के बस ड्राइवर ने बच्चे से गलत काम किया। वह उसे बहला-फुसला कर एकांत स्थान पर ले गया तथा कुकृत्य किया। घटना से बच्चा सहम गया था। कक्षा में उसका अजीब व्यवहार देखकर शिक्षक ने उसे टोका। काफी पूछने पर बच्चे ने रोते हुए घटना बताई। इसके बाद परिजनों को पता चला। मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई गई तथा जेल भी गया।

झेला तनाव: इस घटना से बच्चा व उसके परिवार ने तनाव झेला। भले ही आरोपित जेल पहुंच गया था, लेकिन इस घटना ने बच्चे के मन पर गहरा असर छोड़ा। पिता ने बताया कि उसे वे हर तरह से खुश रखने की कोशिश करते थे। पूरा समय देते थे। कई बार घुमाने भी ले गए। पर उसका मन पढ़ाई में नहीं लगा। इस सदमे से उभरने में उसे समय लगा। उन्होंने बताया कि बच्चे को परेशान देख पूरा परिवार परेशान रहता था। दो-ढाई साल बीत जाने के बाद बच्चा अब सामान्य हुआ है। जब भी वह तनाव में लगता है तो उसे समझाते हैं कि इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी।

दिलाई सजा: भले ही परिवार कई महीनों तक मेंटल ट्रामा से गुजरा, लेकिन इन्होंने हार नहीं मानी। न्यायालय में भी लड़ाई आसान नहीं थी, पर उनका विश्वास अडिग था। बच्चे के साथ गलत करने वाले को सजा दिलाने के लिए परिवार ने भरसक प्रयास किया। पुलिस से लेकर अधिवक्ता तक लोगों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए परिवार का साथ दिया। आखिर परिवार की जीत हुई। एडीजे कोर्ट प्रथम ने 30 मार्च 2018 को अभियुक्त को दोषी सिद्ध किया। उस दौरान एडीजे डॉ. एके विश्वेश थे, जिनका अब स्थानांतरण हो चुका है। कुकृत्य करने पर 10 साल के कठोर कारावास व 25 हजार जुर्माना की सजा हुई। पॉक्सो एक्ट में भी इतनी ही सजा हुई। सही-गलत का ज्ञान देना जरूरी

पीड़ित बच्चे के पिता ने कहा कि हमें बच्चों को बचपन से ही सही गलत की जानकारी देनी चाहिए। घटना के बाद उनके बेटे ने घर पर कोई जानकारी नहीं दी थी। वो तो शिक्षक न पूछते तो वह डर के कारण कुछ बताता ही नहीं। उन्होंने कहा कि बाल यौन शोषण संवेदनशील विषय है। इसलिए इस बारे में बच्चों को बहुत ही स्नेह और धैर्य से जानकारी देनी चाहिए।

Posted By: Jagran