हरदोई: सड़कों को बनवाया जा रहा है। मरम्मत भी हो रही है। प्रदेश सरकार ने अभियान चलाकर सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का आदेश भी दिया है, पर जिम्मेदारों के हकीकत पर पर्दा डालने से जनता की समस्याएं दूर नहीं हो पा रही हैं। वर्षों से जिले में एक दो नहीं न जाने कितनी सड़कों की दशा खराब है। उनकी तरफ तो ध्यान नहीं दिया जा रहा है, लेकिन गुरुवार को शहर में आए रहे उपमुख्यमंत्री को चकाचक दिखाने के लिए सड़कों को चमकाया जाता रहा।

कछौना कस्बे की जर्जर सड़क हो या फिर बिलग्राम से कन्नौज मार्ग। कटरा बिल्हौर हाईवे की दशा खराब हो गई है। पिहानी मार्ग पर भी गड्ढे हैं। लखनऊ चुंगी पर भी धीरे धीरे बड़ा गड्ढा हो गया। सरकार ने अभियान चलाकर सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का आदेश दिया तो इन मार्गों ही नहीं अन्य पर चलने वाले लोगों भी उम्मीद की किरण जगी, लेकिन जिले में अभियान शुरू होना तो दूर की बात सड़कों का चिन्हीकरण तक नहीं हो पाया। उन सड़कों को तो जिम्मेदार भूल गए, लेकिन गुरुवार को करोड़ों की सड़कों का लोकार्पण और शिलान्यास करने आ रहे उपमुख्यमंत्री केशव मौर्या को चमाचम सड़के दिखाना नहीं भूले। हेलीकाप्टर से रसखान प्रेक्षागृह आने के बाद मंत्री जी तो कोई हिचकोले न लगें, इसके लिए छोटे छोटे गड्ढे तक सही होते रहे, लेकिन जनता को जिम्मेदार भूले रहे।

आयुष्मान करने को फिर से चलेगा 15 दिन का विशेष अभियान-हरदोई: लाख कोशिश के बाद भी आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड नहीं बन पा रहे हैं। एक बार फिर से गुरुवार 16 तारीख से 15 दिन का अभियान शुरू किया जा रहा है। गांवों में सूची चस्पा कर लोगों को कार्ड बनवाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

आयुष्मान भारत योजना में सामाजिक आर्थिक और जातिगत गणना 2011 की सूची में शामिल लाभार्थियों को शामिल किया गया है, जिसमें 14 लाख 29 हजार 450 परिवारों के कार्ड बनवाने जाने हैं। वैसे तो माना जा रहा है कि हर परिवार में कम से कम तीन से चार व्यक्ति तो होते ही हैं, इस हिसाब से इतनी ही कार्ड बनने चाहिए लेकिन जिले में तो परिवारों की संख्या से भी कम अभी तक मात्र दो लाख 80 हजार 994 गोल्डन कार्ड बन सके हैं। कई बार अभियान के बाद अभी 26 जुलाई से 15 दिन का विशेष अभियान चलाया गया था, जिसमें मात्र छह हजार कार्ड बने। अब 16 सितंबर से फिर से अभियान चलाया जा रहा है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सूर्य मणि त्रिपाठी ने बताया कि सभी लाभार्थियों की सूची है। आशा बहुएं गांव गांव जाकर उन्हें जानकारी देंगी और वह सीएचसी या फिर जनसेवा केंद्र पर पहुंचकर निश्शुल्क कार्ड बनवा सकते हैं।

Edited By: Jagran