हरदोई : प्लास्टिक वातावरण के लिए ही नहीं, स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। दुकानदारों के साथ ही आम लोगों में भी पॉलीथिन के उपयोग न करने के प्रति जागरूकता दिखने लगी है। लोग बाजारों आदि में खुद से कपड़ा आदि के थैला लेकर जाने लगे हैं। प्लास्टिक का कचरा जलाए बिना निस्तारित न होने एवं पॉलीथिन में सामग्री देने पर जुर्माना एवं कार्रवाई से बचने के लिए दुकानदारों ने कपड़ा वाले थैला एवं कागजों के लिफाफा में सामग्री देना शुरू किया तो लोगों ने सामग्री को सुरक्षित घर तक लाने के लिए खुद के थैले को उपयोग में लाना शुरू कर दिया है। जबकि पॉलीथिन के खिलाफ चलने वाला अभियान फाइलों में कैद हो गया। वहीं पैकिग बंद सामग्री अभी भी दुकानों पर रखी दिख जाती है।

सिगल यूज पॉलीथिन के साथ ही प्लास्टिक मुक्त भारत बनाए जाने की पहल गांधी जयंती यानी कि बुधवार से शुरू होगी। प्लास्टिक मुक्त भारत बनाए जाने के लिए प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को भी जोड़ा गया है। वहीं सिगल यूज पॉलीथिन को प्रतिबंधित किए जाने के लिए चलाए गए अभियान में जुर्माना एवं पुलिसिया कार्रवाई देख चुके दुकानदारों ने पॉलीथिन को खुद ही बाय-बाय बोल दिया है। अब वह कपड़ा वाले थैला एवं कागज के लिफाफों को उपयोग में ला रहे हैं।

दुकानदारों का कहना है कि अभियान चले या न चले, लेकिन अब वह पॉलीथिन को छोड़ चुके हैं। दोबारा से पॉलीथिन के प्रयोग की ओर नहीं लौटेंगे। पॉलीथिन के प्रयोग से कार्रवाई के भय के साथ ही दुकानदारी भी पूरे दिन खराब होती है। जबकि दुकानदारी से होने वाली आमदनी से ही परिवार के पालन-पोषण की व्यवस्था जुटानी पड़ती है। ऐसे में देश और परिवार पहले है।

Posted By: Jagran

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