हरदोई: शिक्षा से दूर बच्चों को विद्यालय भेजने की योजना का जरूरतमंदों को लाभ नहीं मिल पाया। 499 बच्चों को शिक्षा की धारा से जोड़ने के लिए साढ़े 22 लाख धनराशि जारी की गई, लेकिन मात्र 298 बच्चों को ही विद्यालय पहुंचाए जाने की योजना तैयार हो पाई। न सेवानिवृत्त अध्यापकों ने रुचि ली, न ही केंद्र संचालन को बच्चे मिले। ऐसे में मात्र 35 वैकल्पिक केंद्रों का ही संचालन हो पाएगा। करीब 20 लाख से अधिक धनराशि वापस चली जाएगी।

आउट आफ स्कूल बच्चों को शिक्षा की धारा से जोड़ने के लिए विशेष वैकल्पिक केंद्र खोले जाते हैं। इस बार स्कूल चलो अभियान के बाद सर्वे में 2746 आउट आफ स्कूल बच्चे मिले थे। इसमें से 2130 बच्चे छह वर्ष से कम के थे तो उन्हें स्कूल पहुंचाने का आदेश दे दिया गया। 616 बच्चे सात से 14 वर्ष के थे। हालांकि, जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद 499 बच्चे ही बचे और इन बच्चों के वैकल्पिक केंद्र खोलने के लिए राज्य परियोजना निदेशालय ने 4500 रुपये प्रति बच्चा के हिसाब से 22 लाख 45 हजार 500 रुपये स्वीकृत किए। बच्चों को शिक्षा की धारा से जोड़कर उनकी आयु के अनुसार कक्षा में प्रवेश कराया जाना था। कम से कम पांच बच्चों पर एक केंद्र और उसमें सेवानिवृत्त अध्यापक की नियुक्ति होनी थी। पांच बच्चों पर दो हजार और पांच से 10 बच्चों पर उन्हें चार हजार रुपये प्रति माह मानदेय मिलना था। परियोजना की यह योजना जिले में लागू नहीं हो सकी। एक विद्यालय के आसपास कम से कम पांच बच्चों की शर्त पूरी नहीं हो सकी। सेवानिवृत्त अध्यापकों ने भी रुचि नहीं ली। ऐसे में प्राथमिक के 140 बच्चों के लिए 21 और उच्च प्राथमिक में 158 बच्चों के लिए 14 केंद्रों को ही हरी झंडी मिली। ये केंद्र अब विद्यालयों में ही संचालित होंगे और अध्यापक या शिक्षामित्र ही ड्रॉप आउट बच्चों को पढ़ाएंगे। उसके बदले उन्हें कोई अतिरिक्त मानदेय नहीं बल्कि प्रति बच्चा स्टेशनरी के लिए 800 रुपये ही दी जाएगी। वर्जन-

कम संख्या वाले गांवों में जो 210 बच्चे बचे हैं, अध्यापकों को ही उन्हें विद्यालय लाकर पढ़ाने के आदेश जारी किए जा रहे हैं। -हरिपाल, जिला समन्वयक, सामुदायिक सहभागिता

Posted By: Jagran

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