हरदोई : केस एक : शाहजहांपुर के कांट निवासी पूजा का मायका टड़ियावां में हैं। सोमवार को उसके पेट में दर्द और बुखार आया। स्वजन उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। ग्लूकोज की बोतल न होने पर स्वजन बाहर से खरीदकर लाए।

केस दो : टड़ियावां निवासी करिश्मा की तबीयत बिगड़ने पर स्वजन उसे लेकर इमरजेंसी पहुंचे। चिकित्सक ने प्राथमिक उपचार के बाद वार्ड में भेज दिया। स्वजन से ग्लूकोज की बोतल बाहर से मंगाई गई।

कोरोना की तीसरी लहर को लेकर सरकार और स्वास्थ्य महकमा बड़े स्तर पर तैयारी कर रहा है और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर किया जा रहा है, लेकिन जिला अस्पताल का यह हाल है कि अस्पताल में ग्लूकोज की बोतलें तक नहीं हैं और मरीजों के तीमारदार बाहर से ग्लूकोज की बोतल खरीदकर ला रहे हैं।

कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम हो गई है। मौसम के बदलाव के साथ ही संक्रामक बीमारियों ने दस्तक दे दी है। ओपीडी के अलावा इमरजेंसी में भी करीब 50 से 60 मरीज पहुंच रहे हैं। गंभीर मरीजों को भर्ती भी किया जा रहा है। साधारण मरीजों को दवा देकर ही घर भेज दिया जाता है। मरीजों में उल्टी और दस्त के कारण पानी की कमी पूरी करने के लिए उन्हें ग्लूकोज की आरएल, डीएनएस या एनएस की बोतल मरीज की स्थिति के हिसाब से लगाई जाती है। पिछले चार दिनों से इमरजेंसी कक्ष में ग्लूकोज की कोई भी बोतल नहीं है, एक-दो दिन वार्डों से लाकर काम चलाया गया। रविवार को हालत यह हो गई कि पूरे अस्पताल में ग्लूकोज की बोतलें खत्म हो गई। इसके बाद अस्पताल में आने वाले मरीजों के तीमारदारों से बाहर से खरीदकर मंगाई जाने लगी। ग्लूकोज की बोतल के लिए अस्पताल प्रशासन की ओर डिमांड कई बार भेजी गई। इसके बाद रिमाइंडर भी भेजा जा चुका है, लेकिन ग्लूकोज की बोतलें नहीं पहुंच सकी है।

बोले जिम्मेदार : अस्पताल की ओर से ग्लूकोज की बोतल के लिए डिमांड भेजी गई है। जल्द ही अस्पताल को ग्लूकोज की बोतल मिल जाएंगी।

डॉ. एके शाक्य, सीएमएस

Edited By: Jagran