हरदोई: महात्मा गांधी विचारों की पोथी हैं। ऐसे विचार जिन्होंने देश-दुनिया को नई राह दिखाई। सत्य, अहिसा, स्वच्छता, स्वराज, सेवा, अस्पृश्यता, स्त्री उत्थान, धर्मनिरपक्षेता, भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके विचार थे। जिन्हें पाकर भारत समेत दुनिया में कई सामाजिक क्रांतियां हुईं। दुनिया बदल गई है। आधुनिकता की आंधी में लोगों के विचारों को बदल दिया है, लेकिन आज भी समाज में ऐसे बहुत से लोग हैं जोकि गांधी जी की विचारधारा पर चल रहे हैं। विचारधारा को उन्होंने अपने स्वभाव में शामिल कर लिया है। वैसे तो जिले में ऐसे सैकड़ों लोग हैं, वह लोगों से आज के दिन से गांधी जी के विचारों का पालन करने की अपील कर रहे हैं। समाज के कुछ खास लोगों में देंखे तो.. 01 एचआरडी 12

सत्य की राह पर चलने का लिया संकल्प --प्रसिद्ध प्राकृतिक चिकित्सक डा. राजेश मिश्र ने हमेशा सत्य की राह पर चलने का संकल्प लिया। वह कहते हैं कि चिकित्सा के क्षेत्र में उन्हें देश के प्रतिष्ठित संस्थानों ने आमंत्रित किया। उन्हें पता था कि जहां वह बुलाए जा रहे हैं, वहां पर उसूलों से समझौता करना पड़ेगा। जोकि मंजूर नहीं था और आमंत्रण अस्वीकार कर दिया। वह चुनौती के रूप में कहते हैं कि कभी भी उन्होंने न कभी भी खुद झूठ बोला न दूसरे को झूठ के रास्ते पर चलने की सलाह दी। उनका कहना है कि सभी को संकल्प लेना चाहिए।

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स्वच्छता की दीवानगी में रहते गुरुप्रसाद ---संडीला निवासी समाजसेवी गुरुप्रसाद स्वच्छता के पर्याय बन गए हैं। वह खुद के लिए कम दूसरों के लिए ज्यादा जीते हैं। राह में कोई रोड़ा दिख जाए तो उसे फेंक देते। सड़क पर गड्ढे को खुद मिट्टी से भरते। सार्वजनिक स्थलों पर साफ सफाई में उन्हें कभी हीनता नहीं लगती है। स्वच्छता अभियान के लिए उन्होंने श्मशान घाट पर एक कमरा ही बनवा रखा है। स्वच्छता के प्रति उनकी दीवानगी को देखकर नगर पालिका ने उन्हें अपना ब्रांड एंबेसडर घोषित किया था। वह कहते हैं कि गांधी जयंती पर सभी स्वच्छता का संकल्प लें।

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दूसरों के लिए जी रहे जयराम

---जीना तो यह उसी का जिसने यह राज जाना, है काम आदमी का औरों के काम आना। सेवानिवृत्त प्रोफेसर डा. जयराम गुप्ता इसकी जीती जागती मिसाल हैं। खुद भयंकर रोग से ग्रसित हैं, लेकिन समाज सेवा में कभी पीछे नहीं हटते। धर्मशाला मार्ग निवासी डा. गुप्ता रोज सुबह बिना 26 गरीबों को खाना खिलाए, पानी नहीं पीते हैं। इतना ही नहीं जरूरतमंदों को खाना-कपड़ा बांटना उनकी दिनचर्या में शामिल है। 77 वर्षीय डा. गुप्ता 1999 से लगातार सेवा करते चले आ रहे हैं। बोले अपने लिए तो सब जीते हैं। कम से कम आज से दूसरों की मदद का संकल्प लें। 01 एचआरडी 16

बेटियों के पंखों को दी उड़ान

-सर्वोदय आश्रम की संचालिका उर्मिला श्रीवास्तव नारी उत्थान की प्रतिमूर्ति हैं। शिक्षा की रोशनी से वह महिलाओं की जिदगी से अंधेरा मिटा रही हैं। बेटियों को शिक्षा का उड़ान कार्यक्रम बिना किसी भेदभाव से बालिकाओं को शिक्षा की धारा से जोड़ रहा है। पिछले कई वर्षों से संचालित उड़ान कार्यक्रम से सैकड़ों बेटियां शिक्षित हो चुकी हैं। जो बेटियां गांवों में काम करती थीं। कुछ को तो माता पिता ही नहीं पढ़ाते थे, आज वह पढ़कर लिखकर शिक्षिका तक बन गई हैं। वह कहती हैं कि स्त्री उत्थान एक का नहीं पूरे समाज का है। गांधी जयंती पर हर व्यक्ति को संकल्प लेना चाहिए कि वह इसके लिए काम करेगा। 01 एचआरडी 18

जोगेंद्र सिंह हैं आधुनिक गांधी -समाजसेवी जोगेंद्र सिंह गांधी धर्मनिरपेक्षता की पहचान हैं। हिदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई आपस में सब भाई भाई की मंशा पर वह काम करते हैं। गांधी जी के विचारों पर काम कर रहे जोगेंद्र सिंह गांधी भवन के संचालन में भी अहम भूमिका निभाते हैं। खुद सिख हैं लेकिन हिदुओं में जितना उनका नाम सम्मान है, उससे कम मुस्लिमों में भी नहीं है। ईसाई भी पारिवारिक हैं। समाज सेवा का कोई काम हो वह खुद आगे दिखते हैं। यही उनकी पहचान भी बन गई है। कहते हैं कि धर्म क्या होता है, कर्म ही सब कुछ हैं। सभी के साथ मिलकर चलने का आनंद ही कुछ और है। सभी को प्रतिज्ञा भी लेनी चाहिए।

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भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे जंग कछौना क्षेत्र के बघौड़ा निवासी रामखेलावन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग छेड़ रखी है। सूचना का अधिकार को अपना हथियार बनाया। मंत्रियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारी और यहां तक पुलिस उच्चाधिकारियों से भी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ी। मनरेगा में घोटाला खुलवाया, संडीला में करोड़ों रुपये की जमीन पर हो रहे कब्जे का विरोध कर समाज की खातिर लड़ाई लड़कर उसे मुक्त कराया। इस लड़ाई में उनका उत्पीड़न भी हुआ। फर्जी मुकदमें तक लगे। जेल भी जाना पड़ा लेकिन रामखेलावन की भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी है। वह कहते हैं आज सभी संकल्प लें कि न भ्रष्टाचार करेंगे न स्वीकार करेंगे। 01 एचआरडी 15

अहिसा को लेकर कर रहे जनजागरण

समाजसेवी सत्यवीर प्रकाश आर्य वैसे तो पेशे से अधिवक्ता हैं, लेकिन अहिसा के पुजारी हैं। संस्कार, संस्कृति और व्यवहार से वह समाज को जोड़ने का काम करते हैं। पर्यावरण बचाने के लिए वह यज्ञ करते और इसके माध्यम से भी लोगों को आपस में मिलजुल कर रहने का संदेश देते हैं। जनजागरण के लिए तो खास अभियान चला रखा है। दुश्मनी छोड़ आपस में प्रेम से रहने के लिए लोगों को साहित्य भी बांटते हैं। अभियान तो अकेले शुरू किया था लेकिन धीरे धीरे अब काफी लोग जुड़ चुके हैं। वह कहते हैं कि गांधी जयंती पर आज लोगों को अहिसा का पालन करने का संकल्प लेना चाहिए।

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अस्पृश्यता की पहचान हैं, अखिलेश सांडी विकास खंड में तैनात शिक्षक अखिलेश अस्पृश्यता की पहचान बन गया है। जाति धर्म से उठकर काम कर रहे अखिलेश की डायरी में जाति-धर्म नहीं जरूरतमंद का नाम रहता है। किसी भी गरीब की बेटी को उसे बहन मानकर मदद करना उसकी दिनचर्या में शामिल है। हर मेधावी बच्चे की मदद करना अपनी जिदगी का उसूल बना रखा है। गांव, जिला और अब तो प्रदेश स्तर पर वह जरूरतमंदों की मदद में आगे बढ़ रहे हैं। कहते हैं कि उन्हें जाति-पांति से नहीं बस काम से मतलब है। वह कहते हैं कि जाति धर्म नहीं सभी एक ईश्वर की संतान हैं,. सभी इसे ही मानें।

Posted By: Jagran

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