हरदोई : चिकित्सकों को यूं हीं धरती का दूसरा भगवान नहीं कहा जाता है। खतरे को जानते हुए भी जान की परवाह किए बिना सीमित संसाधनों के बीच दिन-रात कोरोना वायरस की महामारी को परास्त करने में डटे हुए हैं। इनके हौंसले व जज्बे को हर कोई सलाम कर रहा है। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण से पूरा विश्व दहल उठा है। पीड़ित होने की आशंका से ही लोग अपनों से दूरी बना ले रहे हैं। इसके लिए उन्हें जागरूक भी किया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ चिकित्सक अपने सहयोगियों के साथ विषम परिस्थिति से दो-दो हाथ करने के लिए तैयार हैं। जिला अस्पताल में बने कोरोना आइसोलेशन वार्ड में तीन टीमें आठ-आठ घंटे पीड़ितों की मदद कर रहे हैं। प्रत्येक टीम में चिकित्सक, पैथालाजिस्ट, वार्ड ब्वाय, स्टाफ नर्स व स्वीपर ड्यूटी दे रहे हैं। यह भर्ती संदिग्ध मरीजों के उपचार, साफ-सफाई से लेकर भोजन तक की जिम्मेदारी संभाले हैं। बिना घबराए, कर रहे देश सेवा : चिकित्सा व्यापार नहीं मिशन है। सेवाभाव का संकल्प लेकर नौकरी शुरू की। इस तरह का संक्रमण मैंने कभी न तो देखा था और सुना था। खतरों को जानते हुए भी बिना घबराए, बिना थके जनमानस को इस संकट से उबारने में लगा हॅू।

डॉ. मोहम्मद नौशाद जागरूकता से हारेगा कोरोना : घर से निकलते ही मुंह को ढक कर रखे और शारीरिक दूरी का पालन करें। अगर सर्दी-जुकाम, बुखार से ग्रसित हो तो सीधे अस्पताल आएं, जहां पर परीक्षण के साथ इलाज किया जाएगा।

डॉ. नवनीत आनंद नहीं करते आराम : अस्पताल आने वाले मरीजों के सैंपल लिए जाने के बाद उन्हें भर्ती रखा जाता है। गर्मी में सबसे से अधिक पानी की आवश्यता होती है। जो समय-समय पर वार्ड में जाकर भर्ती लोगों को उपलब्ध कराते रहते हैं।

नीरज राठौर, स्वास्थ्य कर्मी मरीजों की सेवा करना कर्म : आइसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीजों को दवा देना और उन्हें भोजन व पानी उपलब्ध कराना ही कर्म हैं। यह भी किसी के भाई और बहन हैं। इसलिए निस्वार्थ इनकी सेवा में लगे रहते हैं।

मोहम्मद तय्यब, स्वास्थ्य कर्मी

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस