हरदोई: -बानगी एक: मल्लावां बीआरसी में किताबों का भंडार है। विद्यालयों में किताबें नहीं पहुंची। प्राथमिक विद्यालय हर्रैया साहिमपुर के प्रधानाध्यापक रमेश चंद्र अपनी कार से किताबों को लेकर विद्यालय गए।

-बानगी दो: बेनीगंज स्थित कोथावां की बीआरसी के गोदाम में किताबें भरी हैं। अभी वितरण शुरू नहीं हो सका है। कछौना में भी किताबें भरी हैं। दोनों जगह बताया गया कि वितरण का अभी आदेश नहीं आया है।

-बानगी तीन: संडीला बीआरसी में किताबें भरी हैं। पूछने पर बताया गया कि कई न्याय पंचायत क्षेत्रों में किताबें भेजी जा चुकी हैं, लेकिन विद्यालयों में बच्चे बिना किताबें की ही पढ़ाई कर रहे हैं।

सितंबर बीतने को आ गया है, पर बच्चों के हाथों में किताबें नहीं पहुंच पा रही हैं। इंतजार करते-करते परेशान हो चुके अध्यापक खुद अपने वाहनों से किताबें उठाने पहुंचने लगे हैं।

परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की पाठ्य पुस्तकों में हमेशा मनमानी होती है। किराया के नाम पर खेल होता है और पिछले वर्ष तो जिला समन्वयक पर गाज भी गिर चुकी है, लेकिन उसके बाद भी जिम्मेदारों ने सबक नहीं लिया और इस वर्ष भी किताब वितरण में मनमानी की जा रही है। करीब चार लाख 71 हजार 242 बच्चों के लिए 32 लाख 95 हजार 694 पाठ्य पुस्तकें पिछले काफी दिन पहले ही आ जाने की बात बताई जा रही है। इन किताबों को जिला मुख्यालय से बीआरसी और वहां से विद्यालयों तक पहुंचाने की व्यवस्था है। अब किताबें बीआरसी तक तो पहुंच गईं, पर विद्यालयों तक नहीं पहुंची हैं। बीआरसी पर अध्यापकों के आकर किताब ले जाने का इंतजार किया जा रहा है। एक दो नहीं अधिकांश विकास खंडों की यही दशा है, कुछ विद्यालयों में तो अध्यापकों ने परेशान होकर खुद किताबें उठाना शुरू भी कर दिया है। ऐसे में बच्चों की शिक्षा तो प्रभावित हो ही रही है, किराए में भी खेल की योजना बनाई जा रही है। बीआरसी से विद्यालयों तक पहुंचाने का यह है किराया

-पिकअप डाला 1160 रुपये प्रतिदिन डीजल अलग

-मैजिक या फिर ट्रैक्टर ट्राली 393 रुपये प्रतिदिन डीजल अलग

-विद्यालयों में युद्ध स्तर पर किताबें पहुंचाने पर काम हो रहा है। काफी किताबें पहुंच भी चुकी हैं और जल्द ही सभी विद्यालयों में पहुंच जाएंगी।--राकेश शुक्ला, जिला समन्वयक

Edited By: Jagran