हरदोई: जाने अनजाने में बहके कदम ¨जदगी को तबाह कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग भले ही एड्स नियंत्रण की कोशिश में लगा है लेकिन जागरूकता के अभाव में यह फैलता जा रहा है। हर साल एड्स पीड़ितों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। जिला अस्पताल के ही आंकड़े ले लें वर्ष 2015 में मात्र सात रोगी मिले थे, जबकि वर्ष 2018 में अक्टूबर तक ही इनकी संख्या 29 हो गई है।

पूरा विश्व एक दिसंबर को एड्स दिवस के रूप में मनाता है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग इस एमीनो डिफिसेंसी ¨सड्रोम यानी की एचआइवी पाजिटिव के बचाव को उपचार व जागरूकता लाने में जुटी है। एड्स से बचाव और उपचार के लिए राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। इसकी जांच के लिए जिला अस्पताल, महिला अस्पताल से लेकर कुल पांच एकीकृत परामर्श एवं परीक्षण केंद्र संचालित हैं। वर्ष- जांच में मिले रोगी

2015- 152016

172017- 202018- 29

( अक्टूबर तक) एचआइवी पाजिटिव का होता है उपचार : जिला अस्पताल में एकीकृत परामर्श एवं परीक्षण केंद्र पर जांच के दौरान एचआइवी पॉजिटिव की पुष्टि होने पर संबंधित पीड़ित को लखनऊ रेफर किया जाता है। सीएमओ डा. एसके रावत कहते हैं कि पुष्टि वाले पीड़ित की लखनऊ में सीडी फोर सेल जांच कराई जाती है। जहां पर पीड़ित में एड्स यूनिट की मात्रा का आंकलन किया जाता है।

कहां-कहां पर है जांच की सुविधा : जिला चिकित्सालय, महिला चिकित्सालय में जांच और परामर्श की सुविधा उपलब्ध है। इसी के साथ कछौना स्वास्थ्य केंद्र, संडीला और बिलग्राम स्वास्थ्य केंद्र पर भी एकीकृत परामर्श एवं परीक्षण केंद्र संचालित हो रहे हैं।

बचाव के लिए बरते सावधानी : काउंसलर प्रहलाद ¨सह ने बताया कि बचाव के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। सुरक्षित यौन संबंध बनाने चाहिए। इंजेक्शन नया ही प्रयोग में लाना चाहिए। 312 एमएसएम तो 416 हैं एफएसडब्लू

एचआइवी पाजिटिव सबसे ज्यादा असुरक्षित यौन संबंधों से होता है और इसका सबसे बड़ा वाहक सेक्स वर्कर ही माने जाते हैं। हरदोई शहर में ही 416 महिलाएं व 312 पुरुष हैं। संस्था द्वारा जुटाई गई जानकारी के अनुसार एमएसएम ( मैन सेक्स विद मैन ) 312 हैं जिसमें से 5 एचआइवी पॉजिटिव हैं। इसी तरह जिले में 416 महिला सेक्स वर्कर हैं।

Posted By: Jagran